मंगलवार, 11 मई 2010

औरो तै देखा देखी मी भी, पुडीग्यो ये जंजाल मा

औरो तै देखा देखी मी भी, पुडीग्यो  ये  जंजाल   मा
रुप्या पाणि खत्म हवेगेन, बणि ग्यो मी कन्गाल हां - २
डयुटि बटि जब औन्दु घौर, ब्वारि पुडि छ खाट मा
कभी कपाल, कभी टन्गडु, कभी दर्द पेट मा
कभी दर्द पेट मा (कोरस) - २

ब्यो सि पहली स्वर्ग समान, लगदु ये संसार मा
छ्त्यानाश हवेगे अब ता, कजांण क औण मा - २
ब्यो करि तै सोची मीन रौलू, सुख चैन मा
और जादा मुन्डारु हवेगे, यी सरु का औण मा
यु सरु का औण मा (कोरस) - २

डयुटी बटि जब औन्दु देर सी, खाणु बणाणु रात मा
ब्वारी बिचारि ताणिक सियी, वीतै किलाणु हाथ मा - २
सासू ब्वारी कि हवायी लडायी, तब ल्यो मी साथ मा
जू भी सपना देखी छ मीन, सब मिली गे राख मा
सब मिली गे राख मा (कोरस) - २

ब्यो करि तै पछ्तै ग्यो मी, हवेगेन यु हाल हां
डाक्टरो कु चक्कर काटी, मुरिग्यो मी ये साल मा - २
भाड मजान्दू कपडा धोन्दू, कै मा ना तुम बुल्यान
जन मेरा हाल हुया छ्न, तन कैक ना हुयान
तन कैक ना हुयान (कोरस) - २

नयी सुट साडी-बिलोज, लेन्दु हर तन्खवा मा
अपण ईन हाल हुया कि, दिन कटणु छ थिगलो मा - २
औरो तै देखा देखी मी भी, पुडी ग्यो ये जंजाल मा
रुप्या पाणि खत्म हवेगेन, बणि ग्यो मी कन्गाल हां
बणि ग्यो मी कन्गाल हां (कोरस) - २
बणि ग्यो मी कन्गाल हां, बणि ग्यो मी कन्गाल हां
बणि ग्यो मी कन्गाल हां,बणि ग्यो मी कन्गाल हां...................

विनोद जेठुडी

रविवार, 9 मई 2010

हैप्पी न्यु ईयर

पुराणु साल छोडी करला, नयु कू सफ़र
तुम तै म्यारु पहुंची यारॊ, हैप्पी न्यु ईयर - २
हैंसी हैंसी और खुशी खुशी, कटू यु सफ़र
हैपी न्यु ईयर दगडियो, हैप्पी न्यु ईयर

दुआ मी करदु यारो, सदा रैया सुखी......
औण वाल साल तुमतै, दिया हर खुशी - २
हैंसी- हैंसी.......
हैंसी- हैंसी और खुशी-खुशी कटू यु सफ़र
सभी भाई- बहिण्यो तै मेरु हैपी नयु ईयर
हैपी न्यु ईयर दगडियो हैप्पी न्यु ईयर

एक बोतल चलली विस्की.... एक बोतल वियर
मिली-जुली कि रौला सभी, हेल्लो माई डियर - २
मिली-जुली............
मिली-जुली और हंसी खेली तै कटू यु सफ़र
सभी दगडियों तै मेरू..... हैप्पी नयु ईयर
हैपी न्यु ईयर दगडियो हैप्पी न्यु ईयर

जिन्दगी कि दौड मा, क्वी छुडू ना पैथर
हाथ पकडी जौला दगडी, भोल क्या खबर - २
जितका जैसी...........
जितका जैसी भलू हवे साकु, छोडा ना कसर
सभी बुढ्या ज्वान दगडियो, हैप्पी न्यु ईयर
हैपी न्यु ईयर दगडियो हैप्पी न्यु ईयर

हैपी न्यु ईयर दगडियो हैप्पी न्यु ईयर......
हैपी न्यु ईयर दगडियो हैप्पी न्यु ईयर..........

गीतकार - विनोद जेठुडी, गायक - श्री दिनेश रावत व एलबम - "दगडियों कि दगडी"
विडियो कि बहुत बुरी क्वालीटी के लिये खेद व अफ़सोस:-

रविवार, 2 मई 2010

त्यों डालियों ना काट बोडा हे

हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - 2
ब्वाडी भी बतौव बोडा हे
डाली कभी नी काटी बोडी हे
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - (कोरस)

बसकाल जब औनदु बोडा हे
दवी डाली लगावा बोडा हे - 2
तुम ता चली जैल्या बोडा जी
डाली बची राली बोडा जी
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - (कोरस)

लखडो कु बान बोडा हे
जगलं कु नास बोडा हे - 2
सुख्या लखड काटा बोडा जी
घास- घास काटा डालियो कि
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - (कोरस)

त्यों सुख्या डाडं बोडा हे
हरी भरी बणावा बोडा हे -2
जीवन ही डाली बोडा हे
बरखा पाणि भी देन्दा बोडा हे
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - (कोरस)

हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डाल ना काट बोडा हे
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे हे हे................

गीतकार :- विनोद जेठुडी - दगडिया उत्तराखन्डी

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शनिवार, 1 मई 2010

ग्वेर छोरो क दगडी मा

गोर चराण जै छ भै मै, ग्वेर छोरो क दगडी मा
बल्द कि जोडी उ लडादिन, बुलदीन हुरर- हुरर हां
सडकी कि बाठी गोर लिजादिन, रोड करदिन बन्द हां
जन गाडी रुकदी भयो, ढुगं फ़िकदन टोल मां
ग्वेरू छोरा..................
गोर चराण जै छ भै मै, ग्वेर छोरो क दगडी मा
बल्द कि जोडी उ लडादिन, बुलदीन हुरर- हुरर हां
बुलदीन हुरर- हुरर हां बुलदीन हुरर- हुरर हां - (कोरस)

गोर-बखर छोडी जगंल, ये जान्दीन उ सडकी मा
पिल्ला बणै तै गोली खिना छन, मस्त हुया छन खेलो मा
घर जाण कि येयी बारी, गोर पहुच्या छ्न धारी मा
गोर चराण जै छ भै मै ग्वेर छोरो क दगड मा
ग्वेरू छोरा..................
गोर चराण जै छ भै मै, ग्वेर छोरो क दगडी मा
बल्द कि जोडी उ लडादिन, बुलदीन हुरर- हुरर हां
बुलदीन हुरर- हुरर हां, बुलदीन हुरर- हुरर हां - (कोरस)

क्वी-क्वी छोरा ईन भी होदन, छुट छोरो मा लडै करादिन
छुट छोरो तै पिटी-पिटी खन, गोरो तै भी उ डिकादिन
बड-बड ग्वेरू येस कना छ्न, छुट्टो क बुरा हाल हां
गोर चराण जै छ भै मै ग्वेर छोरो क दगड मा
ग्वेरू छोरा..................
गोर चराण जै छ भै मै, ग्वेर छोरो क दगडी मा
बल्द कि जोडी उ लडादिन, बुलदीन हुरर- हुरर हां
बुलदीन हुरर- हुरर हां बुलदीन हुरर- हुरर हां - (कोरस)

क्वी चौलं क्वी तेल ल्यादू, क्वी लेन्दू आलु प्याज हां
ग्वेरू खिचडी बण छ तख, घनघोर जगलों बीच मा
कन बडी मौज औन्दी भयो, खैक ग्वेरु खिचडी हां
गोर चराण जै छ भै मै ग्वेर छोरो क दगड मा
ग्वेरू छोरा..................
गोर चराण जै छ भै मै, ग्वेर छोरो क दगडी मा
बल्द कि जोडी उ लडादिन, बुलदीन हुरर- हुरर हां
बुलदीन हुरर- हुरर हां बुलदीन हुरर- हुरर हां - (कोरस)

आम फ़लेन्डू कि डाली मा जादन, दगडियों तै भी खुब खिलादिन
थैला भोरी तै कान्दी टन्कियू छ, बाठ-बटुयों तै भी देंदन
आम फ़लेन्डू खैक भयो, मन होन्दू तरोट हां
गोर चराण जै छ भै मै ग्वेर छोरो क दगड मा
ग्वेरू छोरा..................
गोर चराण जै छ भै मै, ग्वेरू छोरो क दगडी मा
बल्द कि जोडी उ लडादिन, बुलदीन हुरर- हुरर हां
बुलदीन हुरर- हुरर हां बुलदीन हुरर- हुरर हां - (कोरस)

गोर चराण जै छ भै मै, ग्वेरू छोरो क दगडी मा
बल्द कि जोडी उ लडादिन, बुलदीन हुरर- हुरर हां
बुलदीन हुरर- हुरर हां, बुलदीन हुरर- हुरर हां
बुलदीन हुरर- हुरर हां, बुलदीन हुरर- हुरर हां.......

गीतकार - विनोद जेठुडी - दगडिया उत्तराखन्डी
www.vinodjethuri.blogspot.com


(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

रविवार, 25 अप्रैल 2010

माँ मितै बडुलि लगदी..


~  माँ मितै बडुलि लगदी  ~

जब जब मितै याद तेरी औंदि माँ,
तब तब मितै बडुलि भी लगदी माँ।

तू भी माँ मितै याद करणि होली,
रूणी कथका तेरी जिकुडी होलि।
आंखि तेरि भी माँ रुझणि होलि,
बडुलि त्वै ते भी लगणि होली।

तेरी आंख्यू न सदा खुशी देखि मेरी,
आज वू आंख्यू मा पाणी च तेरी|
मन मा तेरो कुलबुलाट मच्यू होलू,
जिकुडी तेरी सुगबुगहाट करणी होली। 

दूधा-भत्ति अर जू बोली मीतै खिलायी,
दुधि बाली गै कन तीन मीतै सुलायी।
कन हूंदो च सुख यू भी तीन नी जाणी|
बस हर दुख म्यार तीन अप्णु जाणी।

कथुका बगत  नज़र तीन मेरि उतारी,
अफु भुखि रेकन पुटगि तीन मेरि भ्वारी।
कुशल रंवा हम वाकुण ब्रत तीना धारी,
उम्र तीना घर बणान मा काटी सारी

,
त्यार आंचल मा छुप्य़ू च ब्रह्मांड इन बुदिन, 
त्यार हथ सदनि आश्रीवाद कुण ही उठिन।
तेरी खुशियूँ की खातिर करी मीन नौकरी,
निभाणू छौ अब बाल-बच्चो की जिम्मेदारी।

रूणि नी रेई तू तख मेरी माँ,
छौ कुशल मंगल मी इख माँ।
करदू प्रार्थना हथ जोडी मेरी  माँ,
राजी खुशी रैई तू तख मेरी माँ।

ओलु छुट्टी दर्शन त्यार मी करलू,
त्यार हथ क स्वाद फिर मी च्खलू।
जख बुललि उख त्वैते मी घुमोलु,
तेरी सुणलु अर अपणी मी सुणोलु।

कनु हूंद भगवान मिल नी जानि,
तु ही छै सब कुछ यू मीन मानि।
मीन भगवान सदेनि त्वैमा देखि,
यां से अगनै मी नी सकदू लेखि।

जब जब मितै याद तेरी औंदि माँ,
तब तब मितै बडुलि भी लगदी माँ।

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

(सबी माँओ ते समर्पित या कविता)


(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)