मि उत्तराखँडी छौ - यू शब्द ही अपणा आप ये ब्लाग क बारा मा बताणा कुण काफी छन। अपणी बोलि/भाषा(गढवाली/कुमाऊँनी) मा आप कुछ लिखण चाणा छवा त चलो दग्ड्या बणीक ये सफर मा साथ निभौला।
अपणी संस्कृति क दगड जुडना क वास्ता हम तै अपण भाषा/बोलि से प्यार करनु चैंद। ह्वे जाओ तैयार अब हमर दगड .....अगर आप चाहणा छन त जरुर मितै बतैन अर मि आप तै शामिल करि दयूल ये ब्लाग का लेखक का रुप मा।
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- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
यूएई कौथिग २०१४ - दुबई में आयोजित दो दिवसीय कौथिग का सफलता पूर्वक मंचन हुआ. देवभूमि से आये प्रसिद्ध गायकों ने दोनों दिन अपने सुरों से यहाँ बसे उत्तराखंडियो को मन्त्र मुग्ध किया.
मुख्य स्पोंसर्स गोल्डन ड्रेगन टूरिज्म के श्री प्रयाग जोशी जी, श्रीमती सुनीता जोशी जी एवं उत्तराखंड एसोसियेशन के अध्यक्ष श्री मनु रावत जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके तत्पश्चात यूएई में बसे उत्तराखंडी बच्चो ने अपने नृत्य और गीत की प्रस्तुति दी. अपनी संस्कृति से जुड़े इन बच्चो की प्रस्तुति काबिले तारीफ़ रही. अनिल गैरोला जी जो दुबई में रहते है उन्होंने अपने अन्य गायक कलाकारों के साथ स्वरचित गीत संगीत द्वारा गीत प्रस्तुर किया.
दियोल पाथ को प्रज्वलित करने के बाद कौथिग में श्री दीपक ध्यानी जी ने कार्यक्रम की शुरुआत की और देवभूमि से आये गायकों का परिचय कराया व् उनका स्वागत नन्ही नन्ही बालिकाओ ने फूलो का गुलदस्ता भेंट कर की. फूलो के गुलदस्ते 'फेरेंज़ फ्लावरस' ने सप्रेम भेंट किये थे. उत्तराखंड से जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने भगवान के आवाहन के साथ अपने गीत प्रस्तुर किये. स्वर कोकिला अनुराधा निराला ने पहली बार दुबई में शिरकत की और सबका मन मोह लिया. कुमाउंनी लोकगायक बिशन सिंह हरियाला ने अपने चिरपरिचित अंदाज में अपने व् गोपाल बाबू गोस्वामी के गीत गाकर श्रोताओ को झूमने पर मजबूर कर दिया. लोकगायक किशन महिपाल ने तो अपने गीतों पर वहां उपस्थित सभी लोगो को नाचने पर मजबूर कर दिया. उत्तराखंडी संगीत के जाने माने न्रिदेशक संजय कुमौला जी की टीम जिसमे द्वारिका प्रसाद नौटियाल [बांसुरी ] सुभाष पांडे जी [ढोलक/दमाऊ] कीर्ती भरतवाण [ हुडकी/ढोल] और विजय बिष्ट [ म्यूजिक पेड ]ने इन वाद्य यंत्रो के साथ माहौल को संगीतमय बनाया ही बल्कि देव भूमि से रूबरू भी कराया.
जहाँ १९ ता को लगभग ४०० + उत्तराखंडी बंधुओ ने इस कार्यक्रम का आनंद लिया वही २१ ता का कार्यक्रम होटल रेस्टोरेंट में कार्य करने वाले बंधुओ के लिए था जिसमे लगभग ३००+ उत्तराखंडी बंधू उपस्थित रहे. होटल रेस्टोरेंट में कार्यरत बंधुओ ने भी मस्ती में नाचकर सभी गायकों को भी जोस में ला दिया.
उत्तराखंड एसोसियेशन के एडमिन ने सभी होटल रेस्टोरेंट में कार्यरत उत्तराखंडी बंधुओ को यूएई के नियमो से अवगत कराया. उन्हें किन किन डोक्यूमेंट की जानकारी होनी चाहिए और क्या पास होना चाहिए. उन्हें संस्था से जुड़ने के फ़ाइदे के साथ उनकी शिक्षा और व्यवसयिक विकास में भी सहायता का भरोसा दिलाया.
इस कार्यक्रम में गोल्डन ड्रेगन टूरिज्म, युनियन इस्न्सुरेंस, बेल्होल स्पेशयलटी अस्पताल, फ्रेनिंज फ्लावर्स और श्री चाँद मौला बक्श के विशेष सहयोग के लिए एसोसियेशन ने धन्यवाद किया. रिवोली आइजोंन के श्री भुवन बहुगुणा जी, पहली फुल HD उत्तराखंडी म्यूजिक एल्बम "पूरवा" के निर्देशक श्री अशवनी नेगी जी और अम्बिका ज्वेलरी के श्री ललित जोशी जी के सहयोग को भी संस्था ने सराहा. ये हमारी संस्था के अहम् सदस्य है और सदा अपना सहयोग देते है. गोल्डन ड्रेगन टूरिज्म , फ्रेनज़ी फ्लावर्स ने कई पुरुस्कार उपस्थित बंधुओ को दिए जिन्हें ड्रा के जरिये निकला गया , इसके अलावा गोल्डन ड्रेगन टूरिज्म एवं फ्रेन्ज़ी फ्लावर्स ने संस्था के सदस्यों के लिए कई आकर्षक घोषणाये की. चाँद मौला जी ने बम्पर ड्रा ४०" का रंगीन टीवी पुरुस्कार स्वरूप भेंट किया.
उत्तराखंड एसोसिउएशन के अध्यक्ष मनु रावतजी, उपाध्यक्ष शैलेन्द्र नेगी जी, सचिव रणजीत चौहान जी, वरिष्ठ सदस्य जय बिष्ट जी, दीपक कुल्वे जी, राजेन्द्र लखेड़ा जी, दीपक ध्यानी जी एवं प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल जी तथा उनकी चार टीमो [ बुरांस, बाघ, खमीरा एवं कंडाली] के सभी सहयोगियों ने इस कार्यक्रम को सफलता की नई ऊंचाई दी. जिनका मुख्य उद्देश्य परदेश में रहकर अपनी संस्कृति और संस्कारो से जुड़े रहना और यहाँ या उत्तराखंड में किसी भी विपदा में साथ खड़े होना और सहायता देना है.
कुछ झलकियाँ
(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)
[पहले जब एक नव विवाहित युवा परदेश जाता था तो उसका मन कैसे व्याकुल होता था और क्या सोचता था, उस के भावो को सन्देश में जब वह अपनी पत्नी को लिखता था .... चंद पंक्तियों में समेटने का एक प्रयास]
याद तेरी आणी रेंद, किले छौं दूर सवाल मन ते पूछ्णू रेंदू फोटो देखीक रगरयाणु रेंदू, भुक्की तेरी फोटो मा पीणू रेंदू नी जणदू कब रात हूंद अर केबरी सुबेर, इन च नौकरी मेरी बस सम्लौण मा तेरी, नौकरी दगडी ज़िंदगी गुजरनी च मेरी
कबी याद मा मेरी, देखी क सीसा बांद सी तू सजणी त होली देखी फोटू अर पढ़ीक चिठ्ठी, अपणी जिकुड़ी ते बुथाणी त होली कबी बणी होली पंदेरी, कबी बणीक घसेरी बौण तू जाणी होली दुख अपरू बिसरी कन, सास ससुर क सेवा तू करणी त होली
कुयेडी डांडीयूं म लगणी होली, दगडया मीते तख खुजाणा ह्वाला डाला बूटा रस्ता दिखणा होला, गोर बछरा छंनियू मा एराणा ह्वाला बजार दुकान मा रौनक लगी होली, म्याला ख्याला बुलाणा ह्वाला देबी दिबता म्यार देसा क खुस ह्वाला, ढोल दामों खूब बजणा ह्वाला
ओलू छुट्टी जब त्वेते मी घुमोलू, कपडा-लता अर बिंदी-पोडर दिलोलू ब्वै बुबा कू आसिरवाद ल्यूल, उंका आंख्यू मा खुसीक आंसू देखी ओलू राजी खुसी रोला द्वी चार पैसा बचोला, तब सब्यू ते मी परदेस घुमोलू द्वी चार साल बाद बोडीक ओलू, कूड़ी पुंगडी दिखलू अपण घर बसोलू
- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)
खुदेंणी न रैई' [गीत के बोल अंत में है ] - ये वीडियो एल्बम है उभरते गायक - विनोद सिरोलाजी के गाये गीतों की जिसमे उनका साथ दिया है अनुराधा निराला जी ने. इसमें गाये व् दर्शाए गीत सभी एक से बढ़कर एक है और मन में, कानो में तथा हृदय में एक जगह बनाते है. जैसे एक गीत है
'पूस' का मैना 'गाथ' ठंडेली, पालन हात्थि अलेली, 'मौ' की 'मकरैण' क्वी नी नह्येंदरू नौली-मंगरी खौलेली फागूण मैना 'दानि' गल्वाड़यूं... रंग को लगालो जाण वालों तुमारी न कवी चिट्ठी-पतरी न रन्त-रैबार यनु क्या गैनी के बौड़ी नि ऐनी यनु क्या पै के छुटिगे घार जाण वालों तुमारी न कवी........
इसमें एक टाइटल गीत है 'गंगा का छाला अर यूं चुयो का बीच ..' वैसे तो कई बार सुना व् देखा है लेकिन आज आपके साथ साँझा कर रहा हूँ कुछ विशेष कारणों से. वैसे इस गीत में एक कहानी है विदेश में रह रहे उस युवा की जो छुट्टी पर अपने गाँव जाता है. हर्शिल उसका गाँव है और दिल्ली से हर्शिल तक सफ़र वह गाड़ी से तय करता है और अपने गढ़ देश को याद करता है उसकी सुन्दरता का बखान करता है और अंत में उसे गाँव पहुँच कर एक सत्य का सामना करना पड़ता है - पलायन. उसे दुःख होता है, सोचता है इस समस्या के बारे में और अंत में वह अपने गाँव में रुक जाता है.
मेरी पसंद के विशेष कारण है.
- पहला कारण विनोद सिरोला जी की आवाज, संगीत, उत्तराखंड के मनभावन दृश्य, तीर्थ स्थानों का जिक्र व् दर्शन तथा इसके बोल जो मन को छूते है.
- दूसरा कारण इस गीत में जहाँ इसमें उत्तराखंड की सुन्दरता का व्याखान है वही पलायन की पीड़ा को भी समझा जा सकता है. पलायन - वास्तव में अच्छी नौकरी व् अच्छी शिक्षा की खातिर अब भी युवा उत्तराखंड से बाहर जा रहे हैं. अगर यही हमें उत्तराखंड में मिल जाए तो इसमें कमी आ सकती है.
- तीसरा और मुख्य कारण है इसमें अभिनय. इसमें अभिनय किया है हमारे ही भाई दीप नेगीजी ने, जो यू ए ई में रहते है लेकिन उनके तन मन में उत्तराखंड बसता है. उनका झुकाव पहले से ही कला, अभिनय और लेखन की ओर है. उन्होंने समय समय पर इसको प्रमाणित भी किया है. हमारे साथ उत्तराखंड एशोसियेशन से जुड़े है और एशोसियेशन के सांस्कृतिक मंच में भी अहम् भूमिका निभाते है. अपनी पुस्तक 'सूर्य अस्त पहाड मस्त' के द्वारा उन्होंने अपनी भाषा, ज्ञान और भावो का उदृत किया है. इस वीडियो में भी उनका अभिनय काबिले तारीफ़ है और उनकी इस प्रतिभा को और करीब से देखने सुनने को मिला. भुल्ला दीप और इस वीडियो में शामिल उनकी टीम के सभी सदस्यों के लिए हमारी शुभकामनाएं !!
आप गायक विनोद सिरोला जी और अन्य कलाकारों के प्रोत्साहन देने हेतू ही नहीं बल्कि इस वीडियो के द्वारा जो सन्देश दिया गया है उसे समझने के लिए भी इस वीडियो को जरुर खरीदे, देखे और सुने
पेश है गीत गंगा का छाला के बोल व् वीडियो
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच-२
कैन बसे या धरती-२
या धरती या गढवाल की,
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच-२
कैन बसे या धरती-२
या धरती गढवाल की,
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच-२
पंचबद्री,पंचकेदार,पंचप्रयाग यखी छ्न
पंचप्रयाग यखी छ्न
पंचबद्री,पंचकेदार,पंचप्रयाग यखी छ्न
पंचप्रयाग यखी छ्न
नंदा कु मैत यख अर शिवजी कु तपोवन,
देव्त्तों का थान छन-२
अर हिमंवंती देवियों कि डोली,
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच
कैन बसे या धरती-२
या धरती गढवाल की,
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच-२
हो हो हो हो हो हो,
हो हो हो हो हो हो
कैन रोपि नि डाली-वोटी ,कैन पाथीनि डाडीं-कांठी
कैन पाथीनि डाडीं-कांठी,
कैन रोपि नि डाली-वोटी ,कैन पाथीनि डाडीं-कांठी
कैन पाथीनि डाडीं-कांठी,
श्वेत रंग मा कैन रंगी नि सबी सी ऊंची यु चूई चांठी,
कैका बोल्यान छ्न बगणी-२
ये गाढ गदना रोली बौली
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच-२
कैन बसे या धरती-२
या धरती गढवाल की,
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच-२
सीधा-सादा मनखी,सीधु -सादु घर संसार यख
सादु घर संसार यख
सीधा-सादा मनखी,सीधु -सादु घर संसार यख
सादु घर संसार यख
कोणी कंडाली खैक भी,मुखडियों मा मौल्यार यख
घणा बौण छ्न छांटा गौं-२
अर मन भौण्या यखका कि बोली
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच
कैन बसे या धरती-२
या धरती या गढवाल की,
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच-२
वैन बणाई लाख जतन कै,हमुन मोल नि जाणी जि,
हमुन मोल नि जाणी जि,
वैन बणाई लाख जतन कै,हमुन मोल नि जाणी जि,
हमुन मोल नि जाणी जि,
स्वर्ग सी स्वाणी धरती छुलैकि परदेश भलु माणी नि,
आवा कुछ दिन रैक ती दिखा-२
सुख सुविधों कि बेडी निखोली,
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच
कैन बसे या धरती-२
या धरती गढवाल की,
गंगा का छाला अर ह्यूं चुलो का बीच-४
- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)