गुरुवार, 25 अप्रैल 2024

उत्तराखंड म लोकसभा चुनाव 2024 सम्पन्न ह्वेन ...



  

उत्तराखंडे कि पंची लोकसभा सीटों पर मतदान प्रतिशत जू दिखण म आई, वे से राजनीतिक दलों अर उम्मीदवारों कि जिकुड़ी घँगतोल म होली कि क्या ह्वाल। प्रचार अर जागरूकता अभियान क तमाम कोशिशों क बावजूद भी  उत्तराखंड का मतदाता बड़ी संख्या म अपण घरो बटी भेर नि निकल। एक तरफ हमते यू भी चेणु, वू भी चेणु - गाली दीण म पिछने नि रैंदा, अर जब सरकार चुनण कि बात आई त घर म बैठया रेन

अभी तक चुनाव आयोग क अनुसार राज्य म 57.24 प्रतिशत मतदान ह्वे यू 58 फीसदी तक जाई सकदू किले कि कुछ सर्विस मतदाता, मतदान कर्मचारियों क मत, दिव्यांग व 85 वर्ष से अधिक आयु क मतदाताओं कू वोट ये म शामिल नि छन राज्य म 83,37,914 माsन केवल 47,72,484 मतदाताओं न अप मताधिकार कू प्रयोग करि यीं बेर टिहरी म 53.82 (पिछल साल 58.30), गढ़वाल म 52.42 (पिछल साल 54.47), अल्मोड़ा 48.82 (पिछल साल 51.82), नैनीताल 62.47 (पिछल  साल 68.69), हरिद्वार 63.53 ( पिछल साल 68.92) मतदान कू % राई।  सबसे कम अल्मोड़ा म अर सबसे ज्यादा हरिद्वार म मतदान कू प्रतिशत राई।

भू-कानून, मूल निवास, पलायन, अर भाषा संविधान की 8 वीं अनुसूची म स्थान जन मुख्य मुद्दा हावी छन पर वोट त करदा, एकता त दिखांदा। दैं या बैं  जने भी वोट दींदा - पर अफसोस च कि हमर उत्तराखंडी बंधु बिल्कुल भी राज्य हित/देशहित नि सुचणा छन - बाकी संस्कृति क नाम पर नचै ल्यावा,फूहड़ता ते दिखाणा रंदीन। संस्कृति अर संस्कारों की भी हेंस उड़ाना रंदीन। साहित्य, भाषा अर हमर रीति रिवाज केवल प्रदर्शन म दिखेणी च। जबकि हमरी संस्कृति, धर्म अर भाषा - साहित्य मनखियो अर समाज क रूप म हमारी पहचान क अभिन्न अंग छनयू हमर विश्वास, मूल्यों अर परंपराओं ते आकार दिंदीन। हमते अपनी जड़ों से संबंधित अर संबंध की भावना प्रदान करदिन। हमरी विरासत क इन पहलुओं ते महत्व दीण अर संरक्षित कर महत्वपूर्ण , किले कि समझण जरूरी च कि हम कख बटी छा अर हम कु छाहमर मौलिकता अर विरासत बणी राव।

मतदान कू अधिकार, भारत म लोकतंत्र की आधारशिला च, जू  नागरिकों ते राजनीतिक परिदृश्य ते आकार दीण  अर अपर नेताओं ते जवाबदेह ठहराण की शक्ति प्रदान करदू। चुनौतियों अर सीमाओं क बावजूद, मतदान कू अधिकार सामाजिक परिवर्तन अर प्रगति क वास्ता एक शक्तिशाली उपकरण च। समावेशिता अर भागीदारी शासन क सिद्धांतों ते बणाई रखिकन, भारत अपणी लोकतांत्रिक नींव ते मजबूत करण जारी रख सकदी अर एक अधिक न्यायसंगत अर प्रतिनिधि समाज सुनिश्चित कर सकदू।


मतदान एक मौलिक अधिकार च अर भारत सहित के  भी लोकतांत्रिक समाज म एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी च। मतदान कू कार्य मनखियों ते अपनी सरकार ते आकार दीण अर उंक जीवन ते प्रभावित करण वोली नीतियों ते  प्रभावित करण म आवाज उठाणे की अनुमति दीन्द। भारत म मतदान क कई लाभ छन
, अर यू लाभ केवल मतपत्र डलण क कार्य से अगनै च।

वोटिंग म भाग लीण से अधिक राजनीतिक जागरूकता अर शिक्षा कु संचार हूँद, किले कि मनखी अपण मूल्यों अर विश्वास क आधार पर अपण वोट क बारे म सूचित निर्णय लीण चांsद। भारत म मतदान एक स्वस्थ लोकतंत्र अर एक संपन्न समाज क वास्ता आवश्यक च। यह महत्वपूर्ण च कि सभी पात्र नागरिक अपण  मताधिकार क प्रयोग करेन अर सब्यू क वास्ता निष्पक्ष अर न्यायपूर्ण समाज सुनिश्चित करने कुण लोकतांत्रिक प्रक्रिया म सक्रिय रूप से भाग ल्यावन।

- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल / दिल्ली 

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2024

ऐतिहासिक समान नागरिक संहिता विधेयक-2024 उत्तराखण्ड विधानसभा म पारित



ऐतिहासिक समान नागरिक संहिता विधेयक-2024 उत्तराखण्ड विधानसभा म पारित

7 फरवरी कुण उत्तराखण्ड विधानसभा म भारतीय संविधान क अनुरूप ऐतिहासिक अर महत्वपूर्ण "समान नागरिक संहिता विधेयक" पारित हूँण पर समस्त प्रदेशवासियों तै हार्दिक शुभकामना।

न्याय, सम्मान, समानता, सशक्तिकरण अर प्रत्येक महिला क अधिकार ते सुरक्षित अर गरिमा ते सुनिश्चित करण  वोल जनकल्याणकारी "समान नागरिक संहिता विधेयक" हेतु माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी अर उत्तराखण्ड सरकार ते हार्दिक बधै।

मुख्यमंत्री धामी जी न ब्वाल कि माँ गंगा अर यमुना क उद्गम स्थल देवभूमि उत्तराखण्ड बटी निकली यूसीसी क रूप म समानता अर समरूपता कि या अविरल धारा संपूर्ण देश कू पथ प्रदर्शित करयल। यू विधेयक मातृशक्ति ते सम्मान अर वूँकि सुरक्षा क प्रति सरकारे  की प्रतिबद्धता ते भी परिलक्षित करदू।    

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जीsन बोल छयाई कि '21वीं सदी कू तीसर दशक उत्तराखण्ड कू दशक च’ प्रधानमंत्री जी क दूरदृष्टि क अनूरुप 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ अर प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं क अनुरूप उत्तराखण्ड सरकार न चुनाव से पैली देवतुल्य जनता क दगड़ करयू वायदा ते पूर्ण कार।    

आज प्रदेश विश्व पटल पर एक नै पछाण बणाणू च। इतिहास रचण वोल उत्तराखण्ड विधायिका क सभी माननीय सदस्यों, यूसीसी  क ड्राफ्ट बणाण वोल कमेटी क सभी सदस्यगणों अर अपणू बहुमूल्य समर्थन दीण वोल देवभूमि की जनता तै बड़थ्वाल कुटुंब क तरफsन बधै अर शुभकामना।


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गुरुवार, 23 नवंबर 2023

इगास - उत्तराखण्ड कु लोकपर्व



इगास - 23 नवंबर, 2023 

उत्तराखण्ड म त्यौहारों कु अपर अलग महत्व च। बगवाल ( दिवली ) क ठीक ग्यारह दिन बाद इगास मनये जांद। द्वि आखर - इगास क्या च, किले मनये जांद अर कन  म मनये  जांद।

त्यौहार कै न कै मान्यता क दगड़ जुडया छन – हमर सनातन धर्म म देबी दिबताओं क दगड़, क्षेत्रिय मान्यताओं क दगड़ या क्वी व्यक्ति विशेष  क दगड़।

इन मनै जांद कि रामचन्द्र जी क अयोध्या लौटsण कि खबर हमर उत्तराखण्ड क पहाड़ों म ग्यारह दिन बाद मिली। उत्तराखण्ड क लुखों न दिया जलैsन, भैलू जलैsन अर मिठsई बटिन।  बगवाल अर इगास द्वि त्यौहार ही धूमधाम से मनये जंदिन।    

एक कथा इन भी च कि तिब्बत से लडै करण क वास्ता जब हमर क्षेत्र क सेना माधो सिंह भण्डारी क नेतृत्व म जई छे जु वापिस नि आई त लोग घबरे गिन, शोक म डूब गिन। माधो सिंह भंडारी क विरोधि लुखोंsमाधो सिंह क मरे जाणsक खबर फैला द्ययाई।  माधो सिंह  भंडारी उच्छनंदन गढ़ पहुंच गे छयाई अर र गढ़पति की बेटी उदिना ते अपड़  दगड़ लये छयाई अर श्रीनगर कु युद्ध जीतीsकन  ये दिन पर वापिस  आई छयाई।    तब समस्त क्षेत्रsक लुखोंsन दीप जलेsकन खुसी मनेई।  

एक और कथा महाभारत काल से भी जुड़ी । दंत कथाओंsक अनुसार महाभारत काल म भीम ते कै राक्षस ते  युद्धsक चेतावनी दे छेबिन्डि दिनो तक युद्ध चल अर जब भीम वापस लौटिन त पांडवोंsन दीपोत्सव मनाई।  बुले जांद कि ये अवसर ते भी इगास क रूप म ही मने जांद।

गौं क सबी मनखि दिया जलन्दिन, भैलू जलन्दिन  अर पकवान बणेन्दिन। भैलू खूब खिले जांद। भैलू जलाण  क वास्ता चीड़ क डाsल क लखड़ ( किले कि लीसू बंडी  देर तक जलदू) कु प्रयोग करदिन।  बगवाल/इगास/बूढ़ी दिवाली क दिन पूजा पाठ क बाद गौं क मनखि एकठ्ठा ह्वे कन भैलो खिलदिन। गौं क लोग करतब करदिन अर पारंपरिक लोक गीतों ( भैलो रे भैलो, काखरी को रैलू / अर उज़्यलू आलो,  अंधेरों  भागलो)  पर नचदिन। पंडों, छन्चरी झूमेलों जन नृत्य खूब नचे  जंदिन।   

आज देवोत्थान एकादशी भी हून्द। धार्मिक मान्यताओं क अनुसार सृष्टि क संचालक विष्णु जी दिबता चअर मैना क  योग निंद्रा से जगदिन अर पर पर कार्यभार ते सम्भलदिन। मिठ्ठा करेला अर लाल बासमती कू भात बणाई जांद।

आप सब्यू ते इगास अर देवोत्थान एकादशी कि हार्दिक बधै, शुभकामना छन  

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शनिवार, 18 नवंबर 2023

गुठयार लग्यूं च



 

खतणू च क्वी, बिराणू च क्वी

बुलणू च क्वी, सनकौणू च क्वी

बुतणू च क्वी, खाणू च क्वी

सर्याणू च क्वी, बोकणू च क्वी

 

धाद लगणि च, कुछ त बटेणु च कखि

धुवां उठणू च, कुछ त फुकेंणु च कखि

धूल उडणि च, कुछ त सोरेणु च कखि

धूपेणु यख च, दिबता नचणू च कखि

 

ठेकदार बणिक, हेंक ते सताणा छन

लिखयूं हैंका कू, जोर से बुलणा छन

ज्यूंद ते फुकणा, मुरया ते नवाणा छन

अफू छन पकौणा, हैँक ते कटणा छन

 

सब्यूं क, अपर - अपर गुठयार लग्यूं च

घचपच म, खमणाट तख खूब सुणेनि च

बिग्ड्यूं च, मरखुया बणिक सिंग्याणु च

धद्याणु च, मौका मिलद ही कच्याणु च 

 

खिगताट कना, अपरि हैन्स उड़ाणा छन

भरयूं पुटुक, रवटी हैँककि चुंगन्याणा छन

नेता बण्या, अपरु गुठयार म पौछाणा छन

मलासि कि, फुसलै कि मौ चमकाणा छन

 

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

25 अक्टूबर, 2023 


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बुधवार, 1 नवंबर 2023

म्यार आखर - मेरा कबिता




https://www.youtube.com/watch?v=W0DsMu-_g38



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बुधवार, 2 फ़रवरी 2022

वोट




वोट

चुनावों कू बगत च, नेताओं की बोली लगी च
जने द्याखो उने ही, नेताओं कू येराट मचयूं च

दिखेंद नी छयाई पेल, उंक आज कौथिग लगयूं च
अकड़ सरिल अर कपड़ों की, यूं नेताओ की हरची च 

कबी सुणी नी के की, आज दरजू दरजू पौन्छ्यूं च
हरएक पारटी कू नेता बल, आज भिखमंगू बण्यू च

वायदों की लिस्ट मा, फ्री कू मसेटू खूब रलयू च
बुलण मा क्या जांदू, नारों की थकुली खूब सजयीं च

जन जन टेम अगने बढणु, रंगमत वोटर भी हूणों च
दारु पैसो क छुयाँ फुटण छन, बल मौल्यार खूब अयीं च

एक हेन्काक टंगड़ी खिंची, नातो रिश्तों मा गरमाहट दिखेणी च
भेजी भुल्ला, दीदी भुल्ली, काका काकी, ब्वाडा बौडी, खूब सुनेणु च

पर सूणा बात “प्रतिबिम्ब” की, वोट दीण कू तुम जरुर जयां
अपर हित से पेली राष्ट्रहित दिखेन, फ्री न स्वाभिमान तें जितायाँ


प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल २/२/२२
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रविवार, 2 जनवरी 2022

म्यार चिंतन – २०२२



म्यार चिंतन – २०२२

( ने शुरुआत - अपड़ी हिंदी रचना क रूपांतर)


लेख छयाई जू आखर, अब वू मै से दूर ह्वे गीन

उकेर छयाई जू कागज़ पर, अब वू तुम्हर ह्वे गीन


इमानदार कोशिस ह्वेली, ये बरस कुछ लेखी जोऊँ

अपणा शब्द भावों ते, सेत तुम्हर करीब ले ओंऊँ


शब्द ज्ञान सीमित च, फिर तुमसे कुछ सीख जोलू

स्नेह आसीरबाद तुम्हरू, सेत मिते मिली जालू 


लिखलू मी सच, पर कभी कडू म्यार बोल ह्वाला

'प्रतिबिम्ब' हमर ही ह्वालो, आखर केवल म्यार ह्वाला


-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, २ जनवरी २०२२



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गुरुवार, 14 अक्टूबर 2021

नौ दुर्गा

नौ दुर्गा 


माँ तेरी माया सब्यू न जाणी 
पर केन त्वेते ठीक से नी पछाणी
नौ दिने की तेरी यात्रा बताणू छौं
तेरी रूप की महिमा मी सजाणु छौं 
जे माँ जगतजननी नमोsस्तुते, 
जे माँ सर्वास्त्रधारिणी नमोsस्तुते

पेल तीन दिन तेरी पूजा हून्दी 
ऊर्जा अर शक्ति तेरी पूजे जान्द 
शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी अर चनद्र्घंटा
यूं नाम से त्वेते पछेsणे जान्द
जे माँ भवमोचनी नमोsस्तुते
जे माँ शक्तिस्वरुपणी नमोsस्तुते 

अगला तीन दिन माँ तेरी पूजा हून्दी 
तू लक्ष्मी,समृधि, शान्ति क स्वरूप छेई  
कूष्मांडा, स्कन्दमाता अर कात्यायनी
यूं नामो से तेरी पूजा हम करदा 
जे माँ ब्रह्मवादिनी नमोsस्तुते
जे माँ पिनाकधारिणी नमोsस्तुते 

आखिर मा तीन दिन तेरी पूजा हून्दी 
रिद्धि सिद्धि की पूजा अर तेरी विदे हून्दी
कालरात्रि, महागौरी अर सिद्धिदात्री
तेरा स्वरूप का ही छन यू नाम 
जे माँ भुवनेश्वरी नमोsस्तुते 
जे माँ सत्यानन्दस्वरूपणी नमोsस्तुते 

जे माँ विमिलौत्कार्शिनी, जे माँ निशुम्भशुम्भहननी
जे माँ महिषासुरमर्दिनी, जे माँ चंडमुंडविनाशिनी
जे माँ कात्यायनी, जे माँ सर्वदानवघातिनी

तू ही छे नारायणी, तू ही सत्या
तू ही छे बलप्रदा, तू ही भाव्या
तू ही छे भवानी, तू ही देवमाता
तू ही छे प्रत्यक्षा, तू ही विष्णुमाया

जे माँ जगतजननी नमोsस्तुते, 
जे माँ सर्वास्त्रधारिणी नमोsस्तुते
जे माँ भवमोचनी नमोsस्तुते
जे माँ शक्तिस्वरुपणी नमोsस्तुते 
जे माँ ब्रह्मवादिनी नमोsस्तुते 
जे माँ पिनाकधारिणी नमोsस्तुते 
जे माँ भुवनेश्वरी नमोsस्तुते 
जे माँ सत्यानन्दस्वरूपणी नमोsस्तुते

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल – १४ अक्टूबर, २०२१

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बुधवार, 9 दिसंबर 2020

मेर वा



रम झुम

छम छम

मेर वा

आंदी च

घम घम

चम चम

करदी च

रक रक

सक सक

 

मी बुल्दु

थम थम

ये मेरी

हंसदी बुरास

नी हेंस

मुल मुल

जिकुड़ी हिल्दी

झम झम

सुण मेरी

सुख्यूं पराण

द्वी घड़ी

माया लगोला

 

वा बुल्दी

कभी त

केरा सरम

म्यारा स्वामी

केरा करम

तुमर दगड़

फुटिन करम

तुमरी सौं

सदनी की

झक झक

करदा छौ

बक बक 

फुंड फूंका

अपरी छूईं

-    प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल ०९\१२\२०२०








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शनिवार, 21 नवंबर 2020

लिखण कुण तैयार छौं





देबी दिबतौ की खूब पूजे करी 
डांडा काण्ठियू ते खूब ल्याख
ब्यो बरती कू खूब स्वांग रची  
खुदेड़ गीतों मा खूब रूले 
रास रस्याण की अर खाणे पीणे की
की खूब घपरौल मचे
अब मीन कुछ और लिखण
ज्यू बुलणु कुछ और लिखण कू 
पर सुचणु छौं 
क्या लेखू, क्या नी लेखू 
इने उने की कथुक लिखण
तुम्हीं बताओ दी क्या लिखण
सच लिखण कि झूठ लिखण
त्वेते लिखलू त सच ही लिखलू
अफु ते लिखुल त झूठ लिखलू 
या ही त सच्चे छ अचकाल 

सच दुसरों की ही भलु लग्दु 
अपर झूठ त सदेनी लिख्द आणू छौं 
सच दुसरों कु ही लिखे जांद
बुरे त दुसरों की ही दिखेंदी 
अर टंगड़ खिंचण मा 
हम गढ़वलियूं कु 
क्वी मुक़ाबला भी त नी च
खुद ते हम, सच्चे कु पुतला समझदौ
अंगुली उठाण मा भी त आनंद आन्दु
अफु ते वाह-वाही 
अर दुसर ते सर्मन्दगी मिलद
अर हाँ इन लिखण का बाद ही त 
जीत कू अहसास हून्द 
एवरेस्ट पर जन झण्डा फहराण सी 
अर मुखड़ी पर रंगत बकी बाते की 
चलो यू ही सब
एक बार मी लिखण कुण तैयार छौं  
- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल



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मंगलवार, 10 नवंबर 2020

बुलदु बल ....



बुलदु 
गॉगल्स चढ़े की बौलां बीटे की
अपणी साने की रंगत मा र्ंग्यू
अदक्ची गढ़वेली बचे की
हिंदी अँग्रेजी रीमिक्स करी की
ने पीढ़ी को प्रतिनिधित्व करदू
चक्ड़ैत छ्वारादेसीस्टाइल मा
ने जमानों कू स्वींसांट मा 
बिंगदू भी च अर बुलदु भी च ....
 
बुलदु बल
गोर चराण मा अब सान कहाँ है
खेती बाड़ी मा इख क्या धरयू है
बाड़ी फाणू झुंगर गिचुंद नही जाता है
फास्ट फूड कॉन्टिनेन्टल छ्के की खाता हूँ
टुटी सड़क सुख्या गाड़ा गदोना मा
यीं खरडी पुंगड़ी डांडा मे क्या रखा है
गौं बजारे की अदकची अब चढ़ती नहीं
स्कॉच देसी बियर मा खूब रंगत आती है
 
बुलदु बल
अब गोर बखर नहीं चराना पड़ता है
दूध घी समणी झट से मिल जाता है
पल्यों झुली दाल भात सपोड़ेंन्द नी च
पंजाबी कड़ी दाल मखनी शौक से खांदू
फजल मा रूटी भुज्जी अब नी खयेन्द
ब्रेड टोस्ट बर्गर से ब्रेकफ़ास्ट मी करदू
घौर की साग सगौड़ी मे अब क्या रखा है
कीसे मे नोट जू चेणु वो झट आ जाता है
 
बुल्दू बल
हाँ कभी मुझे घेर गाँव की खुद लग जाती है
गढ़वाली गाणो सुन कर खैरी अपनी भगाता हूँ
ब्यो बरात मा गाणो ढ्स्का लगाण ज्यू बोलता
पर क्या बोल गौं जाणे का दिल नहीं बोलता
कबी सुच्दू भी छौं किले पहाड़ से भेर आया
फिर द्वी पैसा देखि की मन ललचा जाता है
कबी मन करता है काखड़ी अर आम चुराने का
चूना की रूटी अरसा अर स्वाल पकोड़े खाने का  
 
बुलदु बल
देस बिदेस मा उत्तरखंडी पलायन पलायन बोलता
खुद बणी गे परिवार बणे कीहमको उंद धकेलता 
आफू कुण सबै करदीन औरों कुण केरा त जाणा
राज्य/लोगो की क्वी नी सुच्दू सब अपणी चांदा
हमनू अपरु स्वाच त सब धे छ्न हमते लगाणा
बौड़ी आवा बल पलायन रोकागौं ते अपर बचावा
शिक्षा नौकरी क कुछ कारात हम बी बौड़ी औला
तेरी सौं गढ़वाले अर राज्य की सेवा कुछ करला 
 
 
प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल१० नवंबर २०२०



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गुरुवार, 5 नवंबर 2020

अरसा कुण नी तरसा




हिंदी कू अरसा मतलब हूंद टेम च
गढ़वली अरसा मतलब हूंद क्ल्यो च 
देवभूमि क यू एक प्रसिद मिस्ठान च
ब्यो बरतियू मा यू हमरू सम्मान च 
उन बुल्दिन अरसा कर्नाटक बटी अयूँ च
छ्याई अरसालु हमर इख अरसा बण्यू च 
उत्तराखंड मा बरस्यू बटी खूब छयूँ च 
देवभूमि मा अरसा शंकरचार्य क ल्यूँ च 

याद कराणू छौ तुम भी अरसा बणे ल्यावा
चोलों ते राती कुण भीगे की धेरी द्यावा 
उरख्याली मा कूटो या तुम पीसी ल्यावा 
गुड़ चूरी क या ताक बणे सौंफ मिले ल्यावा
ज़रा पाणी, घ्यू मिले की लोई बणे द्यावा
तिल डाली की  अरसों ते न्ये रूप द्यावा 
सरोंसू तेल मा तली की अरसा बणे ल्यावा
गरम खावा चाहे मेना भर कू धेरी द्यावा 

देवभूमि का खाणों मा मिलदी च खूब रस्याण 
अरसों क क्या बुलण अर तुमते अब क्या सुणान
रिंगाsले क बणी हथकंडी च सुबकामो क पछाण 
मालू अर तिमला क पतो मा अरसों कू सम्मूण
मीठे दुनिया भरे की पर अरसा कू स्वाद बेजोड़
भे बंदो कू परेम अर सुसरास मा नी यांक तोड़ 
स्वालों पकोड़ो दगड़ी अरसा बणी हमरी पेछाण
नी बिसरी जेन हमरी संस्कृति अर हमरी पछाण

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, ०५/११/२०२०






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मंगलवार, 3 नवंबर 2020

ठुंगार






आज सूबेर सूबेर
हेर मरच
कमर मटकेकन
म्यार तरफ दिखण बैठ
लगणी त छे
बिगरेली बांद जन
अर मुल मुल हेंसणी भी छे
हंसदा हंसदा
जन बुल्णी होली
पहाड़ ते बिसर ग्यों तुम
मीतेई नी बिसर ह्वेला
हर खाणा कू स्वाद
मेर ठुंगार
लिया बिन
कन मा बिसर सकद्वा तुम

सिलबट्टा मा खड़ा लूण
धनिया अर लेसुण दगड़
पिसी की त मेर माया
उतराखंडी क जीभ हे बतेली
कखड़ी आम अमरूद
चोरsक खई त होली
कखी न कखी
मेरो स्वाद
मेर याद
तुमों मा सम्मूण जन होली

अरे सूणा
जख भी ह्वेला तुम
रुटी भुझी खावा
दाल भात खावा
फाणू भात खावा
झुल्ली भात खावा
चेस्वणी भात खावा
उत्तराखंडी खाणा
बिसरेन न
अर मेर ठुंगार दगड़
स्वाद तुम ल्यावा

बस हेर मरच दगड़
जरा सी संवाद
झट तोड़ी क लयों,
दाल भात अर भुजी
क दगड़ लेकन ठुंगार
गीच मा मेरे आईगे स्वाद
उल्यारु ज्यू
सगोड़ा अर गौं का
सुपीन दिखण बैठ ग्याई

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल ३ नवंबर २०२०


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गुरुवार, 26 अप्रैल 2018

सुचदु रे ग्यों ...


सुचदु रे ग्यों ...

गौ की खुद लगी
बौण धे लगाण बेंठी
सुपिन फिर कुछ इन हवाई

सुचण बैठी कथका बरसो बाद
जल्मभूमी कू अब दर्शन ह्वाला
गौ मा कू हवालों, कू मिललू
कू पछाणsल, कू भेंटुलू
कुजsणी कू मुख मोड़ी जाsलू
कैकी आंखियू मा पाणी आलू

सुपिना मा
झुल्ला झुल्ली थैला मा धारी
रट पट पैटी गयो मन छो भारी
लग ग्यों बाटू
बाज़ार पोंछी त खुज्दू रेग्यो
अपणु कवी नी दिख्ये
नौंनबाला दानु सयाणु
जू दिखेंsनी
सब्यू की आंख्यू मा
सवाल छाई दिखेणू
कु ह्वालो, कु छे रे देशी
रस्ता भूली कि अपणु छे क्वी

बिना कुछ बुल्याँ रस्ता लगी
जणयूं पछन्यु बाटा
मुल मुल हंसण बैंठी
भिटेण लगीन डाला बूटा
बिसरी ग्यु थकान
बैठी ग्यो उंका दगड छ्वीं लगाण
आंदा जांदा मनखी क्वी नी रुकी
बस खित खित हैंसी चिढ़ाणा रेन

नै मकान गौ का
पुरणी कूड़ियों पर हंसणा छयाई
जख क्वी छयाई अपणु
उख अब प्रेम रीतू छयाई
भिभराट अब नी राई
छुया बिसकी गीन
पुंगड़ी बांजी पोड़ गीन
मनखी बिसरी गीन
झणी कख हरची गीन
खिलाण अर गुठ्यार
अब ह्वे गीन खन्द्वार
न क्वी सुणदरू
क्वी नी आंद न क्वी लांद रैबार

खोंल्ये ग्यों,
कैकी सिकेत के मा केरू
क्वी नी दिखे
जेकुण बोल तू छे मेरु

एक द्वी दाना सयाणा क दगड भेंट ह्वाई
जाण पछाण अर फिर सेवा सौंधी ह्वाई
मिलण की खुसी, आंख्यू में देखी
नींद मा भी
उंकी जग्वाल देखि की
म्यार आंख्यू मा भी छयाई पाणी
उंकी पीड़ा देखी मन रुझे गे

म्यार पहाड़
टक लगे की बुलाणा छन
पर ‘प्रतिबिम्ब’ जौ कनके की
यू ही सुचदु रे ग्यों
यूं ही सुचदु रे ग्यों ...

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, दुबई

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शनिवार, 8 अगस्त 2015

कसूर


यूं डांडी कान्ठियू क, ब्वाला क्या च कसूर 
यूं रीता कूड़ी बाड़ीयू क, ब्वाला क्या च कसूर 
किले हुयां छन मनखी, अपरी जलमभूमि से दूर 
कूड़ी पुन्गडी अपणा बांजा करीक, बसी गीन दूर

उन्द जेकन उबक बाटू अब क्वी नी दिखदू 
कथका धे लगाणू छौं, पर अब क्वी नी सुणदू
भासा ज़रा ज़रा क्वी बचांद, बाकी क्वी नी बिंग्दू
सबी कुमौनी गढ़वली, क्वी उत्तराखंडी नी दिखेंदू

दसा पर मेरी, तुमन कलम अपरी खूब तुडीन
गीत तुमन भी म्यार इने विने भी खूब लगेन 
देस विदेस मा मेला खेला तुमन खूब करीन
म्यार नाम पर जगह जगह नोट खूब लुटीन

दीणा कू क्या जी नी दे, ये पहाड़ा न तुमते 
बचपन बटी जवनी तक सैंती पाली अर पोसी
कुछ करण कू बगत आई, तुमन बस बोग मारी 
मीते यखुली छोडी, परदेस मा करी जमे सारी

अबी कुछ नी बिगड़ी, सोची समझी बौडी आवा
अपरी जन्मभूमि ते देर सुबेर ज़रा देखी जावा
बाळ बच्चो ते लावा, वूं ते मेरी पछाण बतावा
जलमभूमि ब्वै समान हूंद, यू तुम जाणी ल्यावा  


-    प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल



डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल (१३ दिसंबर,१९०१ - २४ जुलाई,१९४४)

बड़थ्वाल जी क पुण्यतिथि पर मेर हिन्दी कबिता कू रूपांतर गढ़वली मा


पाली गौ, पौड़ी मा जन्मयू  यू हिन्दी कू लाल
केरिक शोध पेली बार हिन्दी मा, दिखये सब्यू ते बाटू
बणी पेळ भारतीय, जौन हिन्दी मा डी लिट् पाई
नाम छयाई ये साहित्यकार कू पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल

 हिन्दी काव्य मा निर्गुन्वाद पर केर गीन शोध
संस्कृत, अवधी, बज्रभासाअरबी फ़ारसी क छयाई वू ते बोध
संत, सिद्ध,नाथ अर भक्ति कू केर वून विश्लेषण
दूर दृष्टी कू परिचायक, निबंधाकर, अर छयाई वू समीक्षक

हिन्दी ते ने आयाम दे ग्याई यू हिन्दी कू सेवक
केर ग्याई दुनिया मा नाम हिन्दी कू यू लेखक
बिद्यार्थी आज भी वूका रचनाओ ते पढिक शोध करदीना  
जू बोलिकन गीन वे ते ही छन लोग अपनाना

छ्वाटी उमर मा ही अलविदा बोली ग्याई यू हिन्दी कू नायक
गोरखबाणी अर नाथ सिद्ध रचनाओ की दे ग्याई हमते धरोहर
आज भली ही बिसिर ग्याई  वू ते हिन्दी साहित्य कू समाज
आवा हिन्दी क सम्मान करला, कर्रिक याद ये लेखक ते आज



(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शनिवार, 18 जुलाई 2015

अतुल्य उत्तराखंड



देवभूमि च जे कू नाम, इन च हमर अपणु अतुल्य उत्तराखंड
संस्कृति अर संस्कार छन विरासत, इन पछाण च उत्तराखंड
गढ़वली, कुमौनी, जौनसारी जन भासा बढेदीन हमरी सान
डांडी - कांठी कू मुल्क, इख क धरती च हमर मान सम्मान

स्कन्द पुराणों मा उदृत च नौ कुर्माचल अर केदारखंड जे क
ऋषि अर मुनियों क च जख धाम, तपोभूमि बुल्दीन नाम वे क
बावन गढ़, चार धाम, पंच प्रयाग यी भूमि ते पावन छन बणाणा
गंगोत्री  - जमनोत्री अजी भी छन जनमानस की तीस बुझाणा

कुमाॐ मंडल मा अन्दिन जिला अल्मोड़ा, चम्पावत, बागेश्वर
नैनीताल, पिथोरागढ़ अर दगड मा आंद वेक उधम सिंह नगर
गडवाल मंडल म अन्दिन जख पौड़ी, टिहरी, चमोली, हरिद्वार
रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी अर देहरादून, जख बटी चलदी सरकार

धौली, विष्णु गंगा अर मंदाकिनी छन अलकनंदा ते सजाणा
होंस, गिरी अर आसन नदी छन यमनोत्री की सान बढ़ाणा
राम गंगा, सोंग नदी, कोसी, गोमती गौरी अर  पिंडर नयार
बगणा छन बिना रुक्याँ थक्याँ अर छन उत्तराखंड कू शृगार

म्याला थोलो की च या धरती, बारा बरसू मा आँद जख कुम्भ म्याला
दिबता बुलान्दीन जख जागर, डौंर थाली ढोल दमो छन वूका खेला
फूलो क घाटी, औली, चकराता, कोसानी, अर लैंसडौन ते नी भूल्या
ऋषिकेश, मसूरी, भीमताल अर हेमकुंड साहिब कू बाटू छन खुल्या

संस्कृति अर प्रकृति जख हंसदी खिल्दीन, घुघती जख रैबार पहुंचेदीन
कुयेड़ी जख खैरी सुणान्द, बुरांश अर फ्योली हमर  पहाड़ ते सजादीन
बेडू, तिम्ला, हिसरा, काफल, झुंगर,बाड़ी कफली गीच मा पाणी लियांदीन
झोडा, छपेली, न्योली त रणसिंग, भेरी, मशुकबाज दगड रंगत मचेदीन

गीत संगीत पहाडा कू, खान्णी पीणी पहाड़ा की, घूमण घुमाण पहाड़ मा
अफ़ी आवा, दगडयो ते लावा, उत्तराखंडे की रौंतेली सान देखि कं जावा
छ पूरो बिस्वास मीते ‘प्रतिबिम्ब’, उत्तराखंड क अच्छू दिन बौडी क आला
भासा साहित्य भी खूब छ्वीं लगाला, खैरी न खुसी क दिन वापस आला

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)