सोमवार, 23 जनवरी 2012

गिंदी ....


गिंदी ....
गिंदी छौ बगते की
खूब हव्वा भरी चा
लमडणु छौं खुट्टों का बीच
पतड़े गयों कथगा बगत
केबरि ये फाल
केबरि वे फाल
कथको न पकड़ी
कथको न छ्वाड़ी
लुखों न फ़ौल भी केरि
लुखों न थ्रो भी केरि
जै कु जन मन आयी
तन सब्यून केरि
क्वी जीती क्वी हारी 
केनि खुसी अर केनि मनै गम

पर मी
न जीती न हारी
अर मी
रोज तैयार हवे जांद
नै मैच खिलण कु
जिंदगी कु मैदान मा
या फिर
बगत कु खिलाण मा

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल


(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शुक्रवार, 27 मई 2011

कुजणि ज्या हुणों हवालों



     
       तेर मने की छ्वीं
मेर जिकुडी मा
कुतगली लगे जंदीन

कुयेड़ लग्यु हवाल जन
कन मा दिखुलूँ तेर मुखड़ि
नी बुथै सकणु छौं ये मन ते

सुचणु छौं क्या बोल
जणदु छौं क्या बुल्ण
पर बोलि नी सकणु छौं

रगरयाणु रेंद इनै उनै
कखि बिसरी नी जौं
तबि बरणाणु रेंद त्यार नौं

हरची च निंद
पर सुपिणा दिखणु रेंद
इन पैल कबि नी ह्वाई

केकि खाणी केकि पीणी
हरचि ग्याई भूख तीस
कुजणि ज्या ह्वै हवालों

जुन्यालि रात मा
तारा गीणणु रेंदु
त्वै सोचि की बचाणु रेंदु

जख तख,भीतर भैर
त्वी नज़र आंदी
बौलेयूं त नी गयूं मी कखि


        कुजणि ज्या ह्वे हवालो

                                                   प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शनिवार, 21 मई 2011

यखुलि......



बरसों बटि छौं, इखम ही
कथगा मौसम दिखेनी
आन्द जांद ये बाटा मा
कथुक मन्खि दिखेनी
साक्षी छौं अपणों कु
खुसि अर दु:खो कु

बुधवार, 18 मई 2011

गढ़वाली कुमाऊँनी शब्द: Day - दिन - बार - वार

आए आपको अब गढ़ कुमौ शब्दों से परिचय कराया जाये     गढ़वाली कुमाऊँनी शब्द: Day - दिन - बार - वार  पूरा लेख इस लिंक पर पढ़े।

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

गढ़वाली कुमाऊँनी शब्द: गढ़वाली कुमाऊँनी की अपनी विशेषताए