रविवार, 2 जनवरी 2022

म्यार चिंतन – २०२२



म्यार चिंतन – २०२२

( ने शुरुआत - अपड़ी हिंदी रचना क रूपांतर)


लेख छयाई जू आखर, अब वू मै से दूर ह्वे गीन

उकेर छयाई जू कागज़ पर, अब वू तुम्हर ह्वे गीन


इमानदार कोशिस ह्वेली, ये बरस कुछ लेखी जोऊँ

अपणा शब्द भावों ते, सेत तुम्हर करीब ले ओंऊँ


शब्द ज्ञान सीमित च, फिर तुमसे कुछ सीख जोलू

स्नेह आसीरबाद तुम्हरू, सेत मिते मिली जालू 


लिखलू मी सच, पर कभी कडू म्यार बोल ह्वाला

'प्रतिबिम्ब' हमर ही ह्वालो, आखर केवल म्यार ह्वाला


-प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल, २ जनवरी २०२२



(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

गुरुवार, 14 अक्टूबर 2021

नौ दुर्गा

नौ दुर्गा 


माँ तेरी माया सब्यू न जाणी 
पर केन त्वेते ठीक से नी पछाणी
नौ दिने की तेरी यात्रा बताणू छौं
तेरी रूप की महिमा मी सजाणु छौं 
जे माँ जगतजननी नमोsस्तुते, 
जे माँ सर्वास्त्रधारिणी नमोsस्तुते

पेल तीन दिन तेरी पूजा हून्दी 
ऊर्जा अर शक्ति तेरी पूजे जान्द 
शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी अर चनद्र्घंटा
यूं नाम से त्वेते पछेsणे जान्द
जे माँ भवमोचनी नमोsस्तुते
जे माँ शक्तिस्वरुपणी नमोsस्तुते 

अगला तीन दिन माँ तेरी पूजा हून्दी 
तू लक्ष्मी,समृधि, शान्ति क स्वरूप छेई  
कूष्मांडा, स्कन्दमाता अर कात्यायनी
यूं नामो से तेरी पूजा हम करदा 
जे माँ ब्रह्मवादिनी नमोsस्तुते
जे माँ पिनाकधारिणी नमोsस्तुते 

आखिर मा तीन दिन तेरी पूजा हून्दी 
रिद्धि सिद्धि की पूजा अर तेरी विदे हून्दी
कालरात्रि, महागौरी अर सिद्धिदात्री
तेरा स्वरूप का ही छन यू नाम 
जे माँ भुवनेश्वरी नमोsस्तुते 
जे माँ सत्यानन्दस्वरूपणी नमोsस्तुते 

जे माँ विमिलौत्कार्शिनी, जे माँ निशुम्भशुम्भहननी
जे माँ महिषासुरमर्दिनी, जे माँ चंडमुंडविनाशिनी
जे माँ कात्यायनी, जे माँ सर्वदानवघातिनी

तू ही छे नारायणी, तू ही सत्या
तू ही छे बलप्रदा, तू ही भाव्या
तू ही छे भवानी, तू ही देवमाता
तू ही छे प्रत्यक्षा, तू ही विष्णुमाया

जे माँ जगतजननी नमोsस्तुते, 
जे माँ सर्वास्त्रधारिणी नमोsस्तुते
जे माँ भवमोचनी नमोsस्तुते
जे माँ शक्तिस्वरुपणी नमोsस्तुते 
जे माँ ब्रह्मवादिनी नमोsस्तुते 
जे माँ पिनाकधारिणी नमोsस्तुते 
जे माँ भुवनेश्वरी नमोsस्तुते 
जे माँ सत्यानन्दस्वरूपणी नमोsस्तुते

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल – १४ अक्टूबर, २०२१

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

बुधवार, 9 दिसंबर 2020

मेर वा



रम झुम

छम छम

मेर वा

आंदी च

घम घम

चम चम

करदी च

रक रक

सक सक

 

मी बुल्दु

थम थम

ये मेरी

हंसदी बुरास

नी हेंस

मुल मुल

जिकुड़ी हिल्दी

झम झम

सुण मेरी

सुख्यूं पराण

द्वी घड़ी

माया लगोला

 

वा बुल्दी

कभी त

केरा सरम

म्यारा स्वामी

केरा करम

तुमर दगड़

फुटिन करम

तुमरी सौं

सदनी की

झक झक

करदा छौ

बक बक 

फुंड फूंका

अपरी छूईं

-    प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल ०९\१२\२०२०








(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शनिवार, 21 नवंबर 2020

लिखण कुण तैयार छौं





देबी दिबतौ की खूब पूजे करी 
डांडा काण्ठियू ते खूब ल्याख
ब्यो बरती कू खूब स्वांग रची  
खुदेड़ गीतों मा खूब रूले 
रास रस्याण की अर खाणे पीणे की
की खूब घपरौल मचे
अब मीन कुछ और लिखण
ज्यू बुलणु कुछ और लिखण कू 
पर सुचणु छौं 
क्या लेखू, क्या नी लेखू 
इने उने की कथुक लिखण
तुम्हीं बताओ दी क्या लिखण
सच लिखण कि झूठ लिखण
त्वेते लिखलू त सच ही लिखलू
अफु ते लिखुल त झूठ लिखलू 
या ही त सच्चे छ अचकाल 

सच दुसरों की ही भलु लग्दु 
अपर झूठ त सदेनी लिख्द आणू छौं 
सच दुसरों कु ही लिखे जांद
बुरे त दुसरों की ही दिखेंदी 
अर टंगड़ खिंचण मा 
हम गढ़वलियूं कु 
क्वी मुक़ाबला भी त नी च
खुद ते हम, सच्चे कु पुतला समझदौ
अंगुली उठाण मा भी त आनंद आन्दु
अफु ते वाह-वाही 
अर दुसर ते सर्मन्दगी मिलद
अर हाँ इन लिखण का बाद ही त 
जीत कू अहसास हून्द 
एवरेस्ट पर जन झण्डा फहराण सी 
अर मुखड़ी पर रंगत बकी बाते की 
चलो यू ही सब
एक बार मी लिखण कुण तैयार छौं  
- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल



(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

मंगलवार, 10 नवंबर 2020

बुलदु बल ....



बुलदु 
गॉगल्स चढ़े की बौलां बीटे की
अपणी साने की रंगत मा र्ंग्यू
अदक्ची गढ़वेली बचे की
हिंदी अँग्रेजी रीमिक्स करी की
ने पीढ़ी को प्रतिनिधित्व करदू
चक्ड़ैत छ्वारादेसीस्टाइल मा
ने जमानों कू स्वींसांट मा 
बिंगदू भी च अर बुलदु भी च ....
 
बुलदु बल
गोर चराण मा अब सान कहाँ है
खेती बाड़ी मा इख क्या धरयू है
बाड़ी फाणू झुंगर गिचुंद नही जाता है
फास्ट फूड कॉन्टिनेन्टल छ्के की खाता हूँ
टुटी सड़क सुख्या गाड़ा गदोना मा
यीं खरडी पुंगड़ी डांडा मे क्या रखा है
गौं बजारे की अदकची अब चढ़ती नहीं
स्कॉच देसी बियर मा खूब रंगत आती है
 
बुलदु बल
अब गोर बखर नहीं चराना पड़ता है
दूध घी समणी झट से मिल जाता है
पल्यों झुली दाल भात सपोड़ेंन्द नी च
पंजाबी कड़ी दाल मखनी शौक से खांदू
फजल मा रूटी भुज्जी अब नी खयेन्द
ब्रेड टोस्ट बर्गर से ब्रेकफ़ास्ट मी करदू
घौर की साग सगौड़ी मे अब क्या रखा है
कीसे मे नोट जू चेणु वो झट आ जाता है
 
बुल्दू बल
हाँ कभी मुझे घेर गाँव की खुद लग जाती है
गढ़वाली गाणो सुन कर खैरी अपनी भगाता हूँ
ब्यो बरात मा गाणो ढ्स्का लगाण ज्यू बोलता
पर क्या बोल गौं जाणे का दिल नहीं बोलता
कबी सुच्दू भी छौं किले पहाड़ से भेर आया
फिर द्वी पैसा देखि की मन ललचा जाता है
कबी मन करता है काखड़ी अर आम चुराने का
चूना की रूटी अरसा अर स्वाल पकोड़े खाने का  
 
बुलदु बल
देस बिदेस मा उत्तरखंडी पलायन पलायन बोलता
खुद बणी गे परिवार बणे कीहमको उंद धकेलता 
आफू कुण सबै करदीन औरों कुण केरा त जाणा
राज्य/लोगो की क्वी नी सुच्दू सब अपणी चांदा
हमनू अपरु स्वाच त सब धे छ्न हमते लगाणा
बौड़ी आवा बल पलायन रोकागौं ते अपर बचावा
शिक्षा नौकरी क कुछ कारात हम बी बौड़ी औला
तेरी सौं गढ़वाले अर राज्य की सेवा कुछ करला 
 
 
प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल१० नवंबर २०२०



(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)