शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

जै देवभूमी उत्तराखन्ड



(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2010

ललीता छो छ्म (गढवाली एलबम)

घास काटी ललीता, भैसू घस्यान्दी,. घास काटी ललीता छो छ्म
घास काटी ललीता छो छ्म (कोरस)
डोल भोरी ललीता दुध पिजादी, दुध कतै ना छो छ्म
दुध कतै ना छो छ्म !! (कोरस)

रात उठी ललीता रतब्याणी कू, रात उठी ललीता छो छ्म
रात उठी ललीता छो छ्म (कोरस)
पाणी भोरि गागर लेन्दी य ललीता, पाणी कतै ना छो छ्म
पाणी कतै ना छो छ्म (कोरस)

छान्छ छोली ललीता ब्यखुनी बगत, छान्छ छोली ललीता छो छम
छान्छ छोली ललीता छो छम (कोरस)
नौणी भोरि परोठी लौन्दी य ललीता, घ्यू कतै ना छो छ्म
घ्यू कतै ना छो छ्म (कोरस)

कोदू पिसी ललीता चुन की रोटी, कोदू पिसी जन्दरू छो छ्म
कोदू पिसी जन्दरू छो छ्म (कोरस)
कोदु की रोटी. बाडी बणौ ललीता, चुनू कतै ना छो छ्म
चुन कतै ना छो छ्म (कोरस)

दाल बोयी ललीता भदाडोक बीच, दाल बोय़ी ललीता छो छ्म
दाल बोय़ी ललीता छो छ्म (कोरस)
दाल भात आज खैलै दे ललीता, दाल कतै ना छो छ्म
दाल कतै ना छो छ्म (कोरस)

पुन्गडियो मा साग पात य ललीता, पुन्गडियो मा साग छो छ्म
पुन्गडियो मा साग छो छ्म (कोरस)
बिथू कु साग मरसू बणै दे, साग कतै ना छो छ्म
साग कतै ना छो छ्म (कोरस)

घास काटी ललीता, भैसू घस्यान्दी,. घास काटी ललीता छो छ्म
घास काटी ललीता छो छ्म (कोरस)
डोल भोरी ललीता दुध पिजादी, दुध कतै ना छो छ्म
दुध कतै ना छो छ्म !! (कोरस)

एलबम - ललीता छो छम्म, स्वर - मीना राणा जी, गीत - विनोद जेठुडी
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(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शनिवार, 2 अक्टूबर 2010

उत्तराखन्ड क शहिदो तै श्रधान्जली


आज ही कू दिन २ अक्टूवर सन १९९४ तै प्रथक राज्य उत्तराखन्ड तै "मुजफ़्फ़रनगर कांड" मा अपण प्राण ख्वे देण वाल शहिदो तै श्रधांजली.... ऊ शहिदो की वलिदानी उत्तराखन्ड क ईतिहास मा सदा अमर रालू...... "जय उत्तराखन्ड जय भारत"

सूणा उत्तराखन्ड वासी
तूम सूणी ल्यावा
अपण देवभूमी तै
तूम अगने बढावा

याद करा वे दिन
चराणनवे साल..
दवी अक्टूवर दिन
हवेन कन हाल..

मांग उत्तराखन्ड की हम
जाण छ दिल्ली..
मुज्जफ़रनगर मू पहुंची
चली गेन गोली..

कत्यो बहिणियों की मांग सून
कत्यो मां की गोद सून
लाठी मारी बहिण्यो तै
कत्यो की बहगी खून..

ऊ मां-बहिण्यो तै
हमारू प्रणाम
ऊ शहिदो तै
हमारू शलाम

उत्तराखन्ड कू विकास कला
ईन हम काम कला
देवभूमी पर अपणी
आंच कभी नी औणी दयोला

सूणा उत्तराखन्ड वासी
तूम सूणी ल्यावा
अपण देवभूमी तै तूम
अगने बढावा

विनोद जेठुडी, 02 अक्टूवर 2010, 12:49 AM, Copyright © Vinod Jethuri www.vinodjethuri.blogspot.com
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शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

ब्वाला जी...

ददा-ददी, नना-ननी सच बुल्दू छ्याई
हमर पहाड मा देवी - दिवता रेंद छयाई
आज भी छीं देवी - दिबता पर रुठया छन
कखि हमर पूर्वजो ते ठेस नी लगी होलि

ब्वाला जी यूँ तो मनाणा कु क्या कन

डांडी कांठियूँ मा घुघुती घुरुदी छैई
अब कुजाण कख गुम ह्वे होलि
रौतेली शान छैई उत्तराखंड की
अब कुजाण जख हरचि होलि

ब्वाला जी अब कख  खुजोला

हेरी भेरी छै पुंगडी, डाल बूटि छ्याई हंसद
बिसर गंवा हम कन दिखेदं छ्याई यू सब
नदियू देखि प्राण हेरु  हून्दू छ्याई वेबरि
आज कखि बांध बणि गै कखि धरती मा समे गै

ब्वाला जी कन मा रुकालो यू बदलाव

क्या बुलणा अब कैकि नज़र  लगी होलि
आज दिखाणा छंवा हम की प्रलय मची
उत्तराखंड मा आज फिर पाणी पाणी हुयँ
पहाड टुटणा छन अर गंगा विकराल बणी

ब्वाला जी कन मा होलु यांकू समाधान

-       प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

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