गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

कौथिक मा राजी-खुशी, रन्त-रैबार और सेवा सौन्यी

पिछले साल मीन दुबई (दुबईखाल) की कौथिक क उपर एक गीत लिखी छ. और ये साल कू कौथिक कु अवसर पर ये गीत तै आप सभी दगडियो खुनी सुणू तै भीजणू छौ..! ये गीत मा गांव बटी अयी बौजी जी की छवी-बत (रैबार) परदेश मा नौकरी करणू द्योरा जी की दगडी दिखायी छ.. आशा करदू की आप तै पसन्द आली..!
पहली-पहली मी सेवा लागान्दू,,,
दुजा मी खुशी मनान्दू,,
तीजा माया उलार...................
घरबटी तुम.. अंया बौजी, क्या लयु रैबार.. -२ (मेल)

पहली- पहली मी सेवा सलान्दू,,,
दुजा मी खुशी मनान्दू,,
तीजा माया उलार................
घर मा सभी..राजी-खुशी, डांडी-कांठियों मा बहार..- २ (फ़ेमेल)

खुद लगी छ मी भी जान्दू,,,
ना बौजी मी अब नी रौन्दू,,
मी भी जाणु घौर.................
सालो हवेगे खुद लगीं अब नी रौन्दू और... - २ (मेल)

ना दयोरा तू ईन ना बोदी,,,
घर जाण कि छ्वी ना लौदी,,
क्या करली घौर...................
नौकरी तै क्या मिलली, क्या होलु पगार..- २ (फ़ेमेल)

मांजी बाबा कि याद औन्दी,,,
डांडी-कान्ठियों की, खुद सतान्दी
करियाली मीन सौर.......................
देखा देखि पहुन्चीगे मी भी, सात समुद्र पोर..-२ (मेल)

हे दयोरा तु, खुब ही बोदी,,,
अपण देव,भुमी रौतेली,,
जौला बौडी घौर.........................
तुम ता बस्या दुर देश मा, बिराण पहुच्या धोर .. - २ (फ़ेमेल)

हे बौजी, भैजीकु खबर,,, ?
दीदी भुलियों तै.. क्या रैबार,,
क्या होण छ घौर..........
गांव खोला और.. रिती-रिवाज, अपणो सी दुर.. -२ (मेल)

हे भैजी तुम तै खबर,,,
दीदी भुलीयो तै यु रैबार,,
आवा बौडी घौर........................
अपणु मुलक.. अपणू देश, अपणो कु धोर.. - २ (फ़ेमेल)

एलबम - ललीता छो छम्म, स्वर - गीता चन्दोला दीदी एंव अर्जून रावत, गीत विनोद जेठुडीCopyright © 2010, Vinod Jethuri  www.vinodjethuri.blogspot.com

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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

कौथिक दुबईखाल की


सयुक्त अरब ईमिरात मे रह रहे प्रवासी उत्तराखन्डियो (उत्तरान्चली एशोसियसन आप ईमिरात ग्रुप) द्वारा नये साल को कौथिक के रुप मे दुबई राज्य मे हर साल हर्शॊउलाष के साथ मनाया जाता है...दुबई (दुबईखाल) के इस कौथिक मे आप सभी को आमन्त्रण हेतू ये कुछ पन्क्तिया सादर:-

२८ गति पौश की या
७ तारिक जनवरी..!
होन्दू हर साल थौल
बल दुबईखाल की..!!
कौथिगेर आला सभी
आली बेटी-ब्वारी भी
दान-सयाण नचला मन्डाण
ढोल-दमो क दगडी..!!
घौर बटी अया महिमानो की
करदा सतकार जी
झुमैद्या दुबईखाल तै आज
अपण सुर-ताल सी..!!
छोडी ईर्श्या, दुश्मन्यात
हम सभी छवा भयात
कौथिग क ये दिन मा
ह्वे जौला हम अभी साथ..!!
अपण घौर-गांव सी दूर
खुदेन्दू पराण भी..
खुद बिसरै द्योला आज
अपणो सी मिली की..!
२८ गति पौश की या
७ तारिक जनवरी..!
होन्दू हर साल थौल
बल दुबईखाल की..!!

27 December 2010 @ 7:10 AM
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गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

खुद मा


जब तीन सोची
मीन भी सोची
पराल लगी
भुक्कि पै
खुद मा तेरी

डाडां डाडां
घुमणु रौं मी
कांडा बैठि
खुटियो मा मेरी
खुद मा तुमरी

चिठ्ठी लेखि
आंखो मा ऎगे पाणी
रुझि गै कागज़
अब क्या लेखु
खुद मा तेरी

जुन्यालि रात
एखुली छौ
तारो क दगडी
केरी बस तेरी बात 
खुद मा तुमरी

तेरी फोटु
कभी पुरेणी सी
कभी नैई सी लगदी
पर बात मी रोज करदू
खुद मा तेरी

रुटि जेल जांद
आग बुझि जांद
शीसा नि दिखदू
रस्ता रोज़ मी दिखदू
खुद मा तुमरी

इनै विनै
दिखणू रैंद
जख जख त्वै दगड़ी
याद छन बसी मेरी
खुद मा तेरी


प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल, अबु धाबी



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बुधवार, 3 नवंबर 2010

शूभ:बग्वाल (Happy Diwali)


चमकुणू होलू आज
मेरू पहाड,
द्यो जगी गे होलू
मेरू गौवं मा !
अन-धन क कुठारो और
दबलो की पूजा होली होणी..!
भैलू और उक्कलो पर
लगी गे होली पिठैयी..!
तेल टपकणु होलू
स्वालो बटी..!
औशी कू दिन येगे
तीन मुख्या तालू भी,
लाल बणी गे होलू..!
छोट-छोट नौनयाल,
लूकण होला,
तालू तै देखी.!
फुलझडी पटाखों की
भडभडाट होली होणी..
गोर-बखर बितगण होला
पटाखो की फ़डफ़डाट सूणी..
भैलू खिनू तै सभी,
हवेगे होला कठ्ठी !
पिठ्या भैलू और
भैलू की लडै..!
मेरू गौंव कू यू रिवाज,
ईन मनाद छौ बग्वाल !
भाईचारा और प्रेम की मिशाल !
अन्न धन्न की ईगास, बग्वाल
मेरू पहाड की ईगास
मेरू पहाड की बग्वाल
मेरू पहाड की रिती-रिवाज

साल भर बटी होन्दी जैकी जग्वाल,
बौडी येगे आज फिर बग्वाल...!
खूशी और प्रेम कू यू त्यौहार..
हो सूख:शान्ति और प्रेम की बहार..!!
 सभी दगडियो तै शूभ:बग्वाल !!!
शूभ:बग्वाल, शूभ:बग्वाल ....!

Copyright © 2010 Vinod Jethuri
३ नवम्बर २०१० @ २३:३३
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शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

जै देवभूमी उत्तराखन्ड



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