शनिवार, 8 अगस्त 2015

कसूर


यूं डांडी कान्ठियू क, ब्वाला क्या च कसूर 
यूं रीता कूड़ी बाड़ीयू क, ब्वाला क्या च कसूर 
किले हुयां छन मनखी, अपरी जलमभूमि से दूर 
कूड़ी पुन्गडी अपणा बांजा करीक, बसी गीन दूर

उन्द जेकन उबक बाटू अब क्वी नी दिखदू 
कथका धे लगाणू छौं, पर अब क्वी नी सुणदू
भासा ज़रा ज़रा क्वी बचांद, बाकी क्वी नी बिंग्दू
सबी कुमौनी गढ़वली, क्वी उत्तराखंडी नी दिखेंदू

दसा पर मेरी, तुमन कलम अपरी खूब तुडीन
गीत तुमन भी म्यार इने विने भी खूब लगेन 
देस विदेस मा मेला खेला तुमन खूब करीन
म्यार नाम पर जगह जगह नोट खूब लुटीन

दीणा कू क्या जी नी दे, ये पहाड़ा न तुमते 
बचपन बटी जवनी तक सैंती पाली अर पोसी
कुछ करण कू बगत आई, तुमन बस बोग मारी 
मीते यखुली छोडी, परदेस मा करी जमे सारी

अबी कुछ नी बिगड़ी, सोची समझी बौडी आवा
अपरी जन्मभूमि ते देर सुबेर ज़रा देखी जावा
बाळ बच्चो ते लावा, वूं ते मेरी पछाण बतावा
जलमभूमि ब्वै समान हूंद, यू तुम जाणी ल्यावा  


-    प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल



डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल (१३ दिसंबर,१९०१ - २४ जुलाई,१९४४)

बड़थ्वाल जी क पुण्यतिथि पर मेर हिन्दी कबिता कू रूपांतर गढ़वली मा


पाली गौ, पौड़ी मा जन्मयू  यू हिन्दी कू लाल
केरिक शोध पेली बार हिन्दी मा, दिखये सब्यू ते बाटू
बणी पेळ भारतीय, जौन हिन्दी मा डी लिट् पाई
नाम छयाई ये साहित्यकार कू पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल

 हिन्दी काव्य मा निर्गुन्वाद पर केर गीन शोध
संस्कृत, अवधी, बज्रभासाअरबी फ़ारसी क छयाई वू ते बोध
संत, सिद्ध,नाथ अर भक्ति कू केर वून विश्लेषण
दूर दृष्टी कू परिचायक, निबंधाकर, अर छयाई वू समीक्षक

हिन्दी ते ने आयाम दे ग्याई यू हिन्दी कू सेवक
केर ग्याई दुनिया मा नाम हिन्दी कू यू लेखक
बिद्यार्थी आज भी वूका रचनाओ ते पढिक शोध करदीना  
जू बोलिकन गीन वे ते ही छन लोग अपनाना

छ्वाटी उमर मा ही अलविदा बोली ग्याई यू हिन्दी कू नायक
गोरखबाणी अर नाथ सिद्ध रचनाओ की दे ग्याई हमते धरोहर
आज भली ही बिसिर ग्याई  वू ते हिन्दी साहित्य कू समाज
आवा हिन्दी क सम्मान करला, कर्रिक याद ये लेखक ते आज



(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शनिवार, 18 जुलाई 2015

अतुल्य उत्तराखंड



देवभूमि च जे कू नाम, इन च हमर अपणु अतुल्य उत्तराखंड
संस्कृति अर संस्कार छन विरासत, इन पछाण च उत्तराखंड
गढ़वली, कुमौनी, जौनसारी जन भासा बढेदीन हमरी सान
डांडी - कांठी कू मुल्क, इख क धरती च हमर मान सम्मान

स्कन्द पुराणों मा उदृत च नौ कुर्माचल अर केदारखंड जे क
ऋषि अर मुनियों क च जख धाम, तपोभूमि बुल्दीन नाम वे क
बावन गढ़, चार धाम, पंच प्रयाग यी भूमि ते पावन छन बणाणा
गंगोत्री  - जमनोत्री अजी भी छन जनमानस की तीस बुझाणा

कुमाॐ मंडल मा अन्दिन जिला अल्मोड़ा, चम्पावत, बागेश्वर
नैनीताल, पिथोरागढ़ अर दगड मा आंद वेक उधम सिंह नगर
गडवाल मंडल म अन्दिन जख पौड़ी, टिहरी, चमोली, हरिद्वार
रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी अर देहरादून, जख बटी चलदी सरकार

धौली, विष्णु गंगा अर मंदाकिनी छन अलकनंदा ते सजाणा
होंस, गिरी अर आसन नदी छन यमनोत्री की सान बढ़ाणा
राम गंगा, सोंग नदी, कोसी, गोमती गौरी अर  पिंडर नयार
बगणा छन बिना रुक्याँ थक्याँ अर छन उत्तराखंड कू शृगार

म्याला थोलो की च या धरती, बारा बरसू मा आँद जख कुम्भ म्याला
दिबता बुलान्दीन जख जागर, डौंर थाली ढोल दमो छन वूका खेला
फूलो क घाटी, औली, चकराता, कोसानी, अर लैंसडौन ते नी भूल्या
ऋषिकेश, मसूरी, भीमताल अर हेमकुंड साहिब कू बाटू छन खुल्या

संस्कृति अर प्रकृति जख हंसदी खिल्दीन, घुघती जख रैबार पहुंचेदीन
कुयेड़ी जख खैरी सुणान्द, बुरांश अर फ्योली हमर  पहाड़ ते सजादीन
बेडू, तिम्ला, हिसरा, काफल, झुंगर,बाड़ी कफली गीच मा पाणी लियांदीन
झोडा, छपेली, न्योली त रणसिंग, भेरी, मशुकबाज दगड रंगत मचेदीन

गीत संगीत पहाडा कू, खान्णी पीणी पहाड़ा की, घूमण घुमाण पहाड़ मा
अफ़ी आवा, दगडयो ते लावा, उत्तराखंडे की रौंतेली सान देखि कं जावा
छ पूरो बिस्वास मीते ‘प्रतिबिम्ब’, उत्तराखंड क अच्छू दिन बौडी क आला

भासा साहित्य भी खूब छ्वीं लगाला, खैरी न खुसी क दिन वापस आला

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

मंगलवार, 14 जुलाई 2015

ठेठ पहाडी





सुबेर साम अद्धी कच्ची पीणू रेंद
बौन्ला बिटे की मी गुराण्नू रेंद
जू नी बोल साक कबी
झांझी बणिक मी बरराणू रेंद

द्वी घूट भीतर जन्दीन त
असली मनखी फिर भेर आन्दू  
क्जायान्णी ते कच्याणू रेंद
नौनियालो ते धम्काणो रेंद

गों का मनखी तब बौग मारी लिंदीन
अर मी दिन मा भी तारा गिणनू रेंद
छौं मी ठेठ पहाड़ी, पछाण ल्यावा
बिना खयां [ सिकार] पियाँ [ दारु] रौंस नी आंदी

के बिगरेल मनखी न ब्वालि हवालो कि
सूर्या अस्त त पहाड़ हवे जान्द मस्त
मी  त दिन रात करदू खान्णी पीन्णी,

पेली मस्त  फिर से जान्दू फिर मी ह्वेकन पस्त 

- प्रतिबिम्ब  बड़थ्वाल 


(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

रविवार, 28 दिसंबर 2014

यूएई कौथिग २०१४ - दुबई




यूएई कौथिग २०१४ - दुबई में आयोजित दो दिवसीय कौथिग का सफलता पूर्वक मंचन हुआ.  देवभूमि से आये प्रसिद्ध गायकों ने दोनों दिन अपने सुरों से यहाँ बसे उत्तराखंडियो को मन्त्र मुग्ध किया. 

मुख्य स्पोंसर्स गोल्डन ड्रेगन टूरिज्म के श्री प्रयाग जोशी जी, श्रीमती सुनीता जोशी जी एवं उत्तराखंड एसोसियेशन  के अध्यक्ष श्री मनु रावत जी ने  दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके तत्पश्चात यूएई में बसे उत्तराखंडी बच्चो ने अपने नृत्य और गीत की प्रस्तुति दी. अपनी संस्कृति से जुड़े इन बच्चो की प्रस्तुति काबिले तारीफ़ रही. अनिल गैरोला जी जो दुबई में रहते है उन्होंने अपने  अन्य गायक कलाकारों के साथ स्वरचित गीत संगीत द्वारा गीत प्रस्तुर किया. 

दियोल पाथ को प्रज्वलित करने के बाद कौथिग में श्री दीपक ध्यानी जी ने कार्यक्रम की शुरुआत की और देवभूमि से आये गायकों का परिचय कराया  व् उनका स्वागत नन्ही नन्ही बालिकाओ ने फूलो का गुलदस्ता भेंट कर की. फूलो के गुलदस्ते 'फेरेंज़ फ्लावरस' ने सप्रेम भेंट किये थे. उत्तराखंड से जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने भगवान के आवाहन के साथ अपने गीत प्रस्तुर किये. स्वर कोकिला अनुराधा निराला ने पहली बार दुबई में शिरकत की और सबका मन मोह लिया.  कुमाउंनी लोकगायक बिशन सिंह हरियाला ने अपने चिरपरिचित अंदाज में अपने व्  गोपाल बाबू गोस्वामी के गीत  गाकर श्रोताओ को झूमने पर मजबूर कर दिया. लोकगायक किशन महिपाल ने तो अपने गीतों पर वहां उपस्थित सभी लोगो को नाचने पर मजबूर कर दिया. उत्तराखंडी संगीत के जाने माने न्रिदेशक संजय कुमौला जी की टीम जिसमे द्वारिका प्रसाद नौटियाल [बांसुरी ] सुभाष पांडे जी [ढोलक/दमाऊ] कीर्ती भरतवाण [ हुडकी/ढोल] और विजय बिष्ट [ म्यूजिक पेड ]ने  इन वाद्य यंत्रो के साथ माहौल को संगीतमय बनाया ही बल्कि देव भूमि से रूबरू भी कराया. 

जहाँ १९ ता को लगभग ४०० + उत्तराखंडी बंधुओ ने इस कार्यक्रम का आनंद लिया वही २१ ता का कार्यक्रम होटल रेस्टोरेंट में कार्य करने वाले बंधुओ के लिए था जिसमे लगभग ३००+ उत्तराखंडी  बंधू उपस्थित रहे. होटल रेस्टोरेंट में कार्यरत बंधुओ ने भी मस्ती में नाचकर सभी गायकों को भी जोस में ला दिया. 
 
उत्तराखंड एसोसियेशन के एडमिन ने सभी होटल रेस्टोरेंट में कार्यरत उत्तराखंडी बंधुओ को यूएई के नियमो से अवगत कराया. उन्हें किन किन डोक्यूमेंट की जानकारी होनी चाहिए और क्या पास होना चाहिए.  उन्हें संस्था से जुड़ने के फ़ाइदे के साथ उनकी शिक्षा और व्यवसयिक विकास में भी सहायता का भरोसा दिलाया. 
 
इस कार्यक्रम में गोल्डन ड्रेगन टूरिज्म, युनियन इस्न्सुरेंस, बेल्होल स्पेशयलटी अस्पताल, फ्रेनिंज  फ्लावर्स और  श्री चाँद मौला बक्श  के विशेष सहयोग के लिए एसोसियेशन ने धन्यवाद  किया. रिवोली आइजोंन के श्री भुवन बहुगुणा जी, पहली फुल HD उत्तराखंडी म्यूजिक एल्बम "पूरवा" के निर्देशक श्री अशवनी नेगी जी और अम्बिका ज्वेलरी के श्री ललित जोशी जी के सहयोग को भी संस्था ने सराहा. ये हमारी संस्था के अहम् सदस्य है और सदा अपना सहयोग देते है.  गोल्डन ड्रेगन टूरिज्म , फ्रेनज़ी फ्लावर्स ने कई पुरुस्कार उपस्थित बंधुओ को दिए  जिन्हें ड्रा के जरिये निकला गया , इसके अलावा गोल्डन ड्रेगन टूरिज्म एवं फ्रेन्ज़ी फ्लावर्स ने संस्था के सदस्यों के लिए कई आकर्षक घोषणाये की. चाँद मौला जी ने बम्पर ड्रा ४०" का रंगीन टीवी पुरुस्कार स्वरूप भेंट किया.
 
उत्तराखंड एसोसिउएशन के अध्यक्ष मनु रावतजी, उपाध्यक्ष शैलेन्द्र नेगी जी, सचिव रणजीत चौहान जी, वरिष्ठ सदस्य जय बिष्ट जी,  दीपक कुल्वे जी, राजेन्द्र लखेड़ा जी, दीपक ध्यानी जी एवं प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल जी  तथा उनकी चार टीमो [ बुरांस, बाघ, खमीरा एवं कंडाली] के सभी सहयोगियों ने इस कार्यक्रम को सफलता की नई ऊंचाई दी. जिनका मुख्य उद्देश्य परदेश में रहकर अपनी संस्कृति  और संस्कारो से जुड़े रहना और यहाँ या उत्तराखंड में किसी भी विपदा में साथ खड़े होना और सहायता देना है. 

कुछ झलकियाँ 








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