गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

नव वर्ष की हार्दिक सुभकामनाये.(Happy New Year 2011)

आप सभी दगडियों तै नयू साल कु हार्दिक शुभकामनायें, औण वालु ये नव वर्ष मा आप और आप कू परिवार मा खूशियो की बहार हो, चारो तरह शुख और शान्ति कु माहौल हो.ईन दुवा मी आप सभी दगडियो तै और आपकू परिवार कु वस्त करदू..अपणु सुभकामना सन्देश आप तक ये गीत कु माध्यम सी पहुंचाणू छौ..."जय उत्तराखन्ड जय भारत"
 

पुराणु साल छोडी करला, नयू कू सफ़र
तुम तै म्यारु पहुंची यारो, हैप्पी नयू इयर - २
हैंसी हैंसी और खुशी खुशी, कटू यु सफ़र
हैपी नयू इयर दगडियो, हैप्पी नयू इयर

दुआ मी करदु यारो, सदा रैया सुखी......
औण वाल साल तुमतै, दिया हर खुशी - २
हैंसी- हैंसी.......
हैंसी- हैंसी और खुशी-खुशी कटू यू सफ़र
सभी भाई- बहिण्यो तै मेरु हैपी नयू इयर
हैपी नयू इयर दगडियो हैप्पी नयू इयर

एक बोतल चलली विस्की.... एक बोतल वियर
मिली-जुली कि रौला सभी, हेल्लो माइ डियर - २
मिली-जुली............
मिली-जुली और हंसी खेली तै कटु यू सफ़र
सभी दगडियों तै मेरू..... हैप्पी नयू इयर
हैपी नयू इयर दगडियो, हैप्पी नयू इयर

जिन्दगी की दौड मा, क्वी छुडू ना पैथर
हाथ पकडी जौला दगडी, भोल क्या खबर.? - २
जितका जैसी...........
जितका जैसी भलू हवे साकू, छोडा ना कसर
सभी बुढ्या ज्वान दगडियो, हैप्पी नयू इयर
हैपी नयू इयर दगडियो हैप्पी नयू इयर

हैपी नयू इयर दगडियो हैप्पी नयू इयर......
हैपी नयू इयर दगडियो हैप्पी नयू इयर..........

गीतकार - विनोद जेठुडी, गायक - श्री दिनेश रावत व एलबम - "दगडियों की दगडी"
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(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

कौथिक मा राजी-खुशी, रन्त-रैबार और सेवा सौन्यी

पिछले साल मीन दुबई (दुबईखाल) की कौथिक क उपर एक गीत लिखी छ. और ये साल कू कौथिक कु अवसर पर ये गीत तै आप सभी दगडियो खुनी सुणू तै भीजणू छौ..! ये गीत मा गांव बटी अयी बौजी जी की छवी-बत (रैबार) परदेश मा नौकरी करणू द्योरा जी की दगडी दिखायी छ.. आशा करदू की आप तै पसन्द आली..!
पहली-पहली मी सेवा लागान्दू,,,
दुजा मी खुशी मनान्दू,,
तीजा माया उलार...................
घरबटी तुम.. अंया बौजी, क्या लयु रैबार.. -२ (मेल)

पहली- पहली मी सेवा सलान्दू,,,
दुजा मी खुशी मनान्दू,,
तीजा माया उलार................
घर मा सभी..राजी-खुशी, डांडी-कांठियों मा बहार..- २ (फ़ेमेल)

खुद लगी छ मी भी जान्दू,,,
ना बौजी मी अब नी रौन्दू,,
मी भी जाणु घौर.................
सालो हवेगे खुद लगीं अब नी रौन्दू और... - २ (मेल)

ना दयोरा तू ईन ना बोदी,,,
घर जाण कि छ्वी ना लौदी,,
क्या करली घौर...................
नौकरी तै क्या मिलली, क्या होलु पगार..- २ (फ़ेमेल)

मांजी बाबा कि याद औन्दी,,,
डांडी-कान्ठियों की, खुद सतान्दी
करियाली मीन सौर.......................
देखा देखि पहुन्चीगे मी भी, सात समुद्र पोर..-२ (मेल)

हे दयोरा तु, खुब ही बोदी,,,
अपण देव,भुमी रौतेली,,
जौला बौडी घौर.........................
तुम ता बस्या दुर देश मा, बिराण पहुच्या धोर .. - २ (फ़ेमेल)

हे बौजी, भैजीकु खबर,,, ?
दीदी भुलियों तै.. क्या रैबार,,
क्या होण छ घौर..........
गांव खोला और.. रिती-रिवाज, अपणो सी दुर.. -२ (मेल)

हे भैजी तुम तै खबर,,,
दीदी भुलीयो तै यु रैबार,,
आवा बौडी घौर........................
अपणु मुलक.. अपणू देश, अपणो कु धोर.. - २ (फ़ेमेल)

एलबम - ललीता छो छम्म, स्वर - गीता चन्दोला दीदी एंव अर्जून रावत, गीत विनोद जेठुडीCopyright © 2010, Vinod Jethuri  www.vinodjethuri.blogspot.com

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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

कौथिक दुबईखाल की


सयुक्त अरब ईमिरात मे रह रहे प्रवासी उत्तराखन्डियो (उत्तरान्चली एशोसियसन आप ईमिरात ग्रुप) द्वारा नये साल को कौथिक के रुप मे दुबई राज्य मे हर साल हर्शॊउलाष के साथ मनाया जाता है...दुबई (दुबईखाल) के इस कौथिक मे आप सभी को आमन्त्रण हेतू ये कुछ पन्क्तिया सादर:-

२८ गति पौश की या
७ तारिक जनवरी..!
होन्दू हर साल थौल
बल दुबईखाल की..!!
कौथिगेर आला सभी
आली बेटी-ब्वारी भी
दान-सयाण नचला मन्डाण
ढोल-दमो क दगडी..!!
घौर बटी अया महिमानो की
करदा सतकार जी
झुमैद्या दुबईखाल तै आज
अपण सुर-ताल सी..!!
छोडी ईर्श्या, दुश्मन्यात
हम सभी छवा भयात
कौथिग क ये दिन मा
ह्वे जौला हम अभी साथ..!!
अपण घौर-गांव सी दूर
खुदेन्दू पराण भी..
खुद बिसरै द्योला आज
अपणो सी मिली की..!
२८ गति पौश की या
७ तारिक जनवरी..!
होन्दू हर साल थौल
बल दुबईखाल की..!!

27 December 2010 @ 7:10 AM
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गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

खुद मा


जब तीन सोची
मीन भी सोची
पराल लगी
भुक्कि पै
खुद मा तेरी

डाडां डाडां
घुमणु रौं मी
कांडा बैठि
खुटियो मा मेरी
खुद मा तुमरी

चिठ्ठी लेखि
आंखो मा ऎगे पाणी
रुझि गै कागज़
अब क्या लेखु
खुद मा तेरी

जुन्यालि रात
एखुली छौ
तारो क दगडी
केरी बस तेरी बात 
खुद मा तुमरी

तेरी फोटु
कभी पुरेणी सी
कभी नैई सी लगदी
पर बात मी रोज करदू
खुद मा तेरी

रुटि जेल जांद
आग बुझि जांद
शीसा नि दिखदू
रस्ता रोज़ मी दिखदू
खुद मा तुमरी

इनै विनै
दिखणू रैंद
जख जख त्वै दगड़ी
याद छन बसी मेरी
खुद मा तेरी


प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल, अबु धाबी



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बुधवार, 3 नवंबर 2010

शूभ:बग्वाल (Happy Diwali)


चमकुणू होलू आज
मेरू पहाड,
द्यो जगी गे होलू
मेरू गौवं मा !
अन-धन क कुठारो और
दबलो की पूजा होली होणी..!
भैलू और उक्कलो पर
लगी गे होली पिठैयी..!
तेल टपकणु होलू
स्वालो बटी..!
औशी कू दिन येगे
तीन मुख्या तालू भी,
लाल बणी गे होलू..!
छोट-छोट नौनयाल,
लूकण होला,
तालू तै देखी.!
फुलझडी पटाखों की
भडभडाट होली होणी..
गोर-बखर बितगण होला
पटाखो की फ़डफ़डाट सूणी..
भैलू खिनू तै सभी,
हवेगे होला कठ्ठी !
पिठ्या भैलू और
भैलू की लडै..!
मेरू गौंव कू यू रिवाज,
ईन मनाद छौ बग्वाल !
भाईचारा और प्रेम की मिशाल !
अन्न धन्न की ईगास, बग्वाल
मेरू पहाड की ईगास
मेरू पहाड की बग्वाल
मेरू पहाड की रिती-रिवाज

साल भर बटी होन्दी जैकी जग्वाल,
बौडी येगे आज फिर बग्वाल...!
खूशी और प्रेम कू यू त्यौहार..
हो सूख:शान्ति और प्रेम की बहार..!!
 सभी दगडियो तै शूभ:बग्वाल !!!
शूभ:बग्वाल, शूभ:बग्वाल ....!

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३ नवम्बर २०१० @ २३:३३
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शनिवार, 23 अक्तूबर 2010

जै देवभूमी उत्तराखन्ड



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शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

ललीता छो छ्म (गढवाली एलबम)

घास काटी ललीता, भैसू घस्यान्दी,. घास काटी ललीता छो छ्म
घास काटी ललीता छो छ्म (कोरस)
डोल भोरी ललीता दुध पिजादी, दुध कतै ना छो छ्म
दुध कतै ना छो छ्म !! (कोरस)

रात उठी ललीता रतब्याणी कू, रात उठी ललीता छो छ्म
रात उठी ललीता छो छ्म (कोरस)
पाणी भोरि गागर लेन्दी य ललीता, पाणी कतै ना छो छ्म
पाणी कतै ना छो छ्म (कोरस)

छान्छ छोली ललीता ब्यखुनी बगत, छान्छ छोली ललीता छो छम
छान्छ छोली ललीता छो छम (कोरस)
नौणी भोरि परोठी लौन्दी य ललीता, घ्यू कतै ना छो छ्म
घ्यू कतै ना छो छ्म (कोरस)

कोदू पिसी ललीता चुन की रोटी, कोदू पिसी जन्दरू छो छ्म
कोदू पिसी जन्दरू छो छ्म (कोरस)
कोदु की रोटी. बाडी बणौ ललीता, चुनू कतै ना छो छ्म
चुन कतै ना छो छ्म (कोरस)

दाल बोयी ललीता भदाडोक बीच, दाल बोय़ी ललीता छो छ्म
दाल बोय़ी ललीता छो छ्म (कोरस)
दाल भात आज खैलै दे ललीता, दाल कतै ना छो छ्म
दाल कतै ना छो छ्म (कोरस)

पुन्गडियो मा साग पात य ललीता, पुन्गडियो मा साग छो छ्म
पुन्गडियो मा साग छो छ्म (कोरस)
बिथू कु साग मरसू बणै दे, साग कतै ना छो छ्म
साग कतै ना छो छ्म (कोरस)

घास काटी ललीता, भैसू घस्यान्दी,. घास काटी ललीता छो छ्म
घास काटी ललीता छो छ्म (कोरस)
डोल भोरी ललीता दुध पिजादी, दुध कतै ना छो छ्म
दुध कतै ना छो छ्म !! (कोरस)

एलबम - ललीता छो छम्म, स्वर - मीना राणा जी, गीत - विनोद जेठुडी
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शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

उत्तराखन्ड क शहिदो तै श्रधान्जली


आज ही कू दिन २ अक्टूवर सन १९९४ तै प्रथक राज्य उत्तराखन्ड तै "मुजफ़्फ़रनगर कांड" मा अपण प्राण ख्वे देण वाल शहिदो तै श्रधांजली.... ऊ शहिदो की वलिदानी उत्तराखन्ड क ईतिहास मा सदा अमर रालू...... "जय उत्तराखन्ड जय भारत"

सूणा उत्तराखन्ड वासी
तूम सूणी ल्यावा
अपण देवभूमी तै
तूम अगने बढावा

याद करा वे दिन
चराणनवे साल..
दवी अक्टूवर दिन
हवेन कन हाल..

मांग उत्तराखन्ड की हम
जाण छ दिल्ली..
मुज्जफ़रनगर मू पहुंची
चली गेन गोली..

कत्यो बहिणियों की मांग सून
कत्यो मां की गोद सून
लाठी मारी बहिण्यो तै
कत्यो की बहगी खून..

ऊ मां-बहिण्यो तै
हमारू प्रणाम
ऊ शहिदो तै
हमारू शलाम

उत्तराखन्ड कू विकास कला
ईन हम काम कला
देवभूमी पर अपणी
आंच कभी नी औणी दयोला

सूणा उत्तराखन्ड वासी
तूम सूणी ल्यावा
अपण देवभूमी तै तूम
अगने बढावा

विनोद जेठुडी, 02 अक्टूवर 2010, 12:49 AM, Copyright © Vinod Jethuri www.vinodjethuri.blogspot.com
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शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

ब्वाला जी...

ददा-ददी, नना-ननी सच बुल्दू छ्याई
हमर पहाड मा देवी - दिवता रेंद छयाई
आज भी छीं देवी - दिबता पर रुठया छन
कखि हमर पूर्वजो ते ठेस नी लगी होलि

ब्वाला जी यूँ तो मनाणा कु क्या कन

डांडी कांठियूँ मा घुघुती घुरुदी छैई
अब कुजाण कख गुम ह्वे होलि
रौतेली शान छैई उत्तराखंड की
अब कुजाण जख हरचि होलि

ब्वाला जी अब कख  खुजोला

हेरी भेरी छै पुंगडी, डाल बूटि छ्याई हंसद
बिसर गंवा हम कन दिखेदं छ्याई यू सब
नदियू देखि प्राण हेरु  हून्दू छ्याई वेबरि
आज कखि बांध बणि गै कखि धरती मा समे गै

ब्वाला जी कन मा रुकालो यू बदलाव

क्या बुलणा अब कैकि नज़र  लगी होलि
आज दिखाणा छंवा हम की प्रलय मची
उत्तराखंड मा आज फिर पाणी पाणी हुयँ
पहाड टुटणा छन अर गंगा विकराल बणी

ब्वाला जी कन मा होलु यांकू समाधान

-       प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

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गुरुवार, 23 सितंबर 2010

ईन बरखा पैली कभी नी देखी

ईन मुसलाधार बरखा ना लगा धी
जख दिखा पाणी, पाणी हुयू छ..
ये पाणी सी अब, हमतै बचा धी

३२ साल कू रिकार्ड भी टूटी....
ईन बरखा पैली कभी नी देखी
पाणी मा पहाड डुबणा छन..
बस करा अब बहुत हवे ग्यायी

घर कूडी भी पाणी लीगी ग्यायी
गोर-बखरा सभी, बैगी ग्यायी....!
बेघर हुंय़ा छन मेरा पहाड क मनखी
ईन्द्रदेव जी तीन क्या करियाली ?

करोडो कू नुकसान हवे ग्यायी
खीयी-कमायी सब पाणी मा ग्यायी
पाणी बगैर तडपणा छा कभी...
आज पाणी मा सरै पहाड डुबै दयायी

गंगा जी कू पाणी बढी ग्यायी
कोसी नदी उफ़ान मा छायी
सागर नी देखी छ कभी !
टीहरी की झील मा यू भी देखीयाली

सैकडों लोगों की जान चली ग्यायी
स्कूल पढदी बच्चो तैभी नी छ्वाडी
श्रर्धान्जली ऊ दिवंगत आत्माओ तै
जून ये पाणी मा प्राण ख्वे दयायी


विनोद जेठुडी 21 सितम्बर 2010, 7:18 AM
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गुरुवार, 16 सितंबर 2010

फ़िर याद ऐगी होली

रंग रंगीली फ़िर याद ऐगी व होली, पांणी मुखडी कु सुखैगी होली।
बार-त्यौहार क्वी भग्यान मनालु, कैकी आंखी खुद मा दुख्णी होली।
मै छौं पापड बेळणु यख, अर वा आंसुम भिजीं रोठी बेळणी होली।
बरखा बत्वाणी यख होण लगीगे, व कखी चुन्नी उडौणी होली।
कुरेडी लगी यख याद दिलौणी छ, ओडा-उड्यार वा बैठीं होली।
जुं डाडियों हम्न बल्द चरैन, वा वख घास काटणी होली।
रंग रंगीली फ़िर याद ऐगी व होली, पांणी मुखडी कु सुखैगी होली।
- चन्द्र मोहन

बुधवार, 1 सितंबर 2010

कुछ इनै भी



कुछ इनै भी……

लीसू सी..
कथुक ध्वालो ये ते फुंडै
मारो कूटो भी
चिपक्यू रेंद यू
हमर दगडी
लीसू सी
  
टिपड़ा 
जन्म ह्वे ब्वै बुबा
टिपडा बनै
बामण भी द्वी पैसा कमै
सुख मा दुख मा
जब कुछ नी सूझी
फिर टिपडा पूजी
ब्यो कुण भी टिपडा मिले
अब ह्वे गीन नोन बाल
हम भी लग्या छंवा
टिपड़ा पूजण मा

मेरे जिकुड़ी
तेर भी अर  मेर भी
जिकुड़ी धक धक करदी
पर अलग अलग बाणी बुलदि
क्वी मयलू
क्वी गुसेलु
क्वी कर दू प्यार
क्वी कर दू वार
हे रे जिकुड़ी

हैंस्या नी केर
नोनि जवान ह्वेगे
लाटी अब
सब्यू की समणी
खित खित नी हैंस्या केर्
निथर लोग ब्वालल कि
ठीक नी
नोनि कु सवर
तु अब
खित खित नी हैंस्या केर  

आंखि
मुखडि मा लगी छन
द्वी ढिबरा सी आंखि
बस अफूकि दिखदू
जू दिखण चान्द
बुल्दू कि
त्यार दुख च म्यार दुख
हैंका कु दुख देखि
फुटि जंदिन यू आंखि
है तेरि आंखि
प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल, अबु धाबी, यू ए ई


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गुरुवार, 26 अगस्त 2010

हम छोडिक चली ग्या यी महफिल तै

हम छोड चले है महफिल को याद आये कभी तो मत रोना
(गढवाली मे अनुवाद करने का एक प्रयास)

हम छोडिक चली ग्या यी महफिल तै,
याद एली अगर त रवै न कभी
यी जिकुडी ते बुथै लेई तू,
घबरालु अगर त रवै न कभी
हम छोडिक चली ग्या यी महफिल तै

एक सुपिन सी देखी छ्याइ हमनू
जब आंख ख्वाली त टूटि ग्याई
यु प्यार अगर सुपिन बनि की
तडपाल तुझे त रवै न कभी
हम छोडिक चली ग्या यी महफिल तै

तु म्यार ख्यालो मे
बरबाद नी कैरी अपर जीवन तै
जब क्वी दगड्या बात त्वै तै
समझालू त रवै न कभी
हम छोडिक चली ग्या यी महफिल तै

जीवन का सफर मा यखुली
मितै त जिन्दा नी छ्वाडली
मुरण की खबर ये मेरी जिकुडी
मिलली त रवै न कभी
हम छोडिक चली ग्या यी महफिल तै

- प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल



(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

सोमवार, 9 अगस्त 2010

गढ़वाली गीत (मेरी सुवा जाणु छौं मी)


(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

शनिवार, 7 अगस्त 2010

द्याखोदी !

( जन्मपत्री मिलाने पर एक व्यंग, कविता के माध्यम से )


जजमानन पण्डाजी से बोली ..
पंडाजी , जर ई जल्म्पत्री मिल्या क्य ?
पंडाजील पत्री देखी , बोली ..
नौनी की कुंडलिम दूसरा स्थानम कांग्रेस
चौथम बी जे पी …….
अर सप्तमम काम्निस्ट बैट्या छंन !
एक हैका थै देख देखी
अपणी अपणी चाल चलना छन !
जजमान इका भाग्य थै दिखणा छन
आरजेडी अर समाज्बादी ,
ब्यो का बाद उन त , सब ठीक ठाक छ
पर डैर याकि चा ….
नाती नतणों हवाला नक्सलवादी !

सुधि सुधि ,मी , स्वीणा नि दिखावा !

बोडी,
अफ़ी अफुम छै बुनी ..
यखका सुचणा छना ..
कि, उन्दु जौला ......
अर तखुन्दा (प्रवासी ) सुचणा छन
कि उबू जौला .....!

मिन बोली , बोडी...,
तू क्या छै सुचणी ?

बोडिल ब्वाळ ...
ना यख वालों न रुकुनु ?
अर , ना ताल वालो ल आणु
गिचा बाबू .. क्या .... ???????
जू बुल्दन बुल्द जा
जू सुचणा छन , सुचुद जा ..

आणा छा, त आवा
जाणा छा , त जावा
पर सुधी सुधी , मी थै
स्वीणा त, नि दिखावा !

पराशर गौर
१८ मई २०१० रात १०२१ पर
कैनाडा

मंथन

होने दो हिने दो
आज विचरो का मंथन
विचारो से उत्पन होगी क्रांति
जग करेगा उसका अभिनन्दन !

सुना है की राजधानी
उंचा सुनती है
सता में बैठे लोग
अंधे,गूंगे, बहरे होते है
अब अंधे, गुंगो को ..
रहा दिखानी होगी
उनसे उनके ही राग में
उनसे बात करनी होगी
करना होगा दूर हमको
उनका वो गुंगा/अंधापन ... होने दो होने दो ..

भूखा - भूखा न सोयेगा अब
अधिकारों की बात करेगा
खोलेगा राज वो अब
पतित भ्रष्ट , भ्रष्टा चारो का
हटो ह्टो, दूर हटो,
ग्रहण करेगी जनता आज राज सिंघ्खासन ..... होने दो होने दो

हासिये पर हो तुम
जनता का रथ मत रोको
बदने दो उसको उसके लक्ष्य तक
मत उसको टोको
रोक न पावोगे प्रभाऊ उसका
गर बिगड़ गई वो
सांस लेना होगा तुमको दूभर
गर बिफर गई वो ...
भुलोमत , मतभूलो
की है जनता जनार्धन .... होने दो ...

आम पथों से राज पथ तक
बस एक ही होगा नारा
हक़ दो, हक़ दो ...हटो
है राज हमारा .......
एक ही स्वर में नभ गूंजेगा तब
स्वीकार नही है , भ्रष्टो का शाशन .. होने दो ...

पराशर गौर
६ मार्च २०१० सुबह ७.२७ पर

अवार्ड क्या हू न्द?

अवार्ड क्या हू न्द ?

वा बोली .
हेजी , यु अवार्ड क्या हू न्द ?
मिन बोली....,
लुखु समणी अपणु तमशु दिखै दिखै
जू ईजात , अर, बेजती हू न्द
वो अवार्ड हुन्द औरी कपाल हू न्द !

parashagaur

बुधवार, 4 अगस्त 2010

अछु ह्वै

मिन बोली पंडत जी ..
जरा ई जन्म पत्री दिखया
कनी दशा लगी होली जू इन ह्वै गे
अछु भलु पड्यु लिखू नोनू छो
मती मरेगी एकी जू , पुलिसम भर्ती ह्वै गे !

पंडित्ल बोली ...
हून त येल नेता छो , पर चला
अछु ह्वै जू पुलिसम चलिगे
अरे जजमान नेता से पुलिस भलो
वो त पाच साल tak रालू , पर युत
ता जिन्दगी भर घूस खालो !
-------------------------
जी आपल सुणी ... बिचरी/रु .... ///

बोडी छेई छजजम बैठी ! आंदा जन्दरो थै , छेई पु छ णी .. " हे भाई लुखो ..! " . तैलया ख्वाल बची ब्वारी कु , क्या हवाई होलू ! जतका तै पूछी, सी बुना छा ! बुन क्या च बोडी , व त स्वील की पिडमा च बिचरी यैडाणी ! कनु म्वार वे बची कु ? जू जम्पत हुयुच ! .., दौड़ी दौड़ी माथि जाऊ . ! . पैलत , कै डाक्टर थै लादू ..! निथर, उ क्या ब्लुक्दन .. द, भाई कन कापली फूटी ... समणी वाली से बुन बैठी " बब़ा, क्या बुन, चुक्पट ह्वैगी मतिकू ! "
तबरी कैल बोली ..., बोडी..., तू बुन क्या च णी चै ?
बोडी बोली अरे बिटा .. " मी बुनू छो, की पिछला साल वे मुख्या मंत्रील जब बोली, की, मी, प्रसब व इमर्जन्सी का वास्ता १०८ गाडी लागाणु ! उ गाडियों थै क्यों फोन कैकी क्वी नि बुलाद्य बची.... परा आआआआआआआआ .. ??????????. !"
कैल बोली .. गे छो .. गे छो ! फोन भी करी छो! , पर, लैन ही नि मिलदी ! बोडी जब लैन ही नि मिलदी , त उथै कन कवाई पता चलालू की फलना गोमा, क्वी स्वीली च पीड माँ !
बोड़ी गुस्स्म फिगरेकी बोली .. " १०८ बान त उ, गिनीज बुक माँ अपणु नों, अपना बाई-बुबा अर दादों नो....., च , लिखाणु ! अरे उत मोरिगी तैरिगी ! पर जू अभी जन्म्यु नि विका बारमा कुछ ना ? अरे यु नेताओं थै कु समझा उ ...!
जू पैदा ह्वै की, ये राज्य मा वोट देणवलु ह्वालू, जू , युथै कुर्सियु पर बैठादिनी या बैठाला ! विका बारमा कुछ ना ..! अरे, जब वेल , १०८ गाडी लगैनी, त , वेथै पता नि छो कि, लैनेकि जरूरत भी उतके जरुरी च ज्त्क्गा की या गाडी ! आगरा बची ईई ..... ब्वारी थै, कुछ ह्वै जालू ना आआआआअ , त , मिन पट नारसिगम जैकी घात घन ! वे १०८ गाडियों का वास्ता अर लैनवालो का वास्ता ! अर जू , युथै दिख्ननीं सकदा .. , उका वास्ता .. !
जनि बोडी .. चुप ह्वै चै कि एक आदिम ताल बीती आई बुन बैठी .. " बोडी, बची कि नौनी ह्वैगी पर ब्वारी जड़ी रै ..! " बोदी थै काटो त खून ना !

परशार्गौर
२६ अप्रैल २०१० रात ८.५१ पर
द ब्वाला बल ....

एक कल्चर प्रोग्रामम में किसी ने , एक सज्जन का मुझ से परिचय कराते हुए कहा .. "पाराशर जी , ये भी आपके इलाक से है ..मिल , बड़ा गर्म जोशी से हाथ मिलै कि , बिना लंग लपोड़ कैकी सीधा , उसै अपणी माँ बोली , याने गड्वाली माँ पूछी .... " आप गडवाली छा "
उन बोली '_------- जी ... हा..., मै गड्वाली हूँ "
मिन बोली ... " क्या आप गड्वाली बोली लिंदा .."
उन बोली ... " मै समझ सकता हूँ लेकिन बोल नहीं पाता "
मिन बोली " किलै ?.."
उन बोली .. " कभी मौका ही नही मिला !"
मिन बोली ..."--- मिन बोली आप थै आपणा बुडा ददो नो याद छ ?
उबं बोली .. " ये क्या होता होता है ?"
उन बोली ..... अभी अभी त आपन बोली कि मै बींग तो सकता हूँ पर बोल नहीं सकता हूँ ? "
मिन समझाई . " बुडा कु मतलब बुडा दादा , याने को पीता ...का पिता !
उन बोली ....." ओ, ई सी ........ /// " शायद कोई.... , सिंह था ! पका पता नहीं ? "
मिन बोली .. " कवी चचा उचा ... उकु नो , त , याद होलू ?"
उन बोली ... " सबसे बड़े चाचा का नाम करामती सिह , सबसे छोटे का नाम गुमनाम और दो बीच वालो का नाम मुझे याद नहीं है ! "
मिन बोली .. .उ कु नो किलै नि याद ? "
उन बोली ..... " वो गौ में रहते है ना ....., इसिलए .."
मिन बोली ... " वो, ई सी.... पर क्या तुम कभी गौ न जांदा क्या ?"
उन बोली ... " गया था एक बार , जब मै छोटा था !"
मिन बोली ... " एक बार क्यों ?'
उन बोली .....'उसके बाद मुझे मोका ही नहीं मिला !"
मिन बोली " मिन सवाल कई कि आप पद्या लिख्या त ह्वैल्या ही ?
उन बोली ...... :' जी जी.. , पी यच डी इन हिस्ट्री ? "
मिन बोली .... " अकबरो ददो नो क्या छो ? '
उन झट से बोली ... " बाबर ..?"
मिन बोली _ " बाबरो बेटा कु ?
उन बोली ....... " हुमायु ..."
मिन बोली ...... " त आप थै युका दादो का नो याद छी पर अपण ना ! इन किलै ?
उन बोली ...... " दादा का नाम बहुत है क्या करना है उन्हें याद करके ? कौन से उन्होंने हमें रोटी देनी है ! इनको याद करके सरकार हमें इनाम देती है ! रोजगार देती है !

मिन बोली ... " आप के गडवाल का छा ?" टेहरी, पोड़ी चमोली ....
उन बोली .... " माफ़ करे .. मै मुबई से हूँ ? जहा एक ही नारा है आम छे मुबई ....///

पराशर गौर
मई ९ २०१० रात १०३९ पर
दयब्तौ की खोज !

बोड़ी चौकम छे बैठी ! आंदा जान्दो दगड छे बच्याणी , कि तैबेरी , मेल्या खोलै रामचन्देरी वाख्म एकी बोड़ी से छुई लगाद लगाद पूछंण बैठी
"... हे जी , तुमल भी सुणी ? "
बोड़ी बोली .. "--- क्या ?"
".. ह्या , बुने, क्वाठा भीतर का वो जेवोर , जौकु नौ .... कने लियु उकु नौ " ! बिन्गैकी की बुलद "------ जौक नौ, स्युजू तुमरा देलम बैठुच ! "
बोड़ील वे जाने देखी आर बोली .. " वो कुता सिंह ..! ."
"हांजी, हां ...! " वी--- वी .... "
वीजने घूरी की बोड़ी बोली " ----- कनु क्या ह्वे कुता सिंह थै ? "
" -----सुणम.. आई कि, उकु नाती घोर च बल औणु , अपना दादा प्रददौ कि कुड़ी थै दिखनो अर अपणा नार्सिंग देब्तो कि पुजाई कनु ? "
"---हाँ --- हाँ !" ददल ,त, नि खोजी आज तक अपणी गौंकु बाटु, अपणी पुगाड़ी - पटुली ! ताखुँदै राई ता जिन्दगी भर ! बोई बाटु हेरी २ मोरीगे ! कुड़ी धुर्पाली उजड़ी गीनी !
न उ आयु अर ना नौनी ! द्वी पड़ी तक कैल भी याख्की शुद्ध नि ले ! बोड़ील , सांस लेकी अर वेकि कुड़ी जाने हेरी बोली .... " ब्वारी .. मित बुनू छो कि, यु नर्सिंग इनी ताखुन्दा बस्या लुखो थै भी नाचे नाचे घोर बुलादु ना त कनु छायू ! पैल, ये सबी नौकरी खुज्यणु तखुन्द गिनी ! अर, अब , वो सबी ..., ये जनि अपणा अपणा दय्बतो थै खुज्यानु घोर ऐ जांदा ना..., त , हे पणमेस्वरा .. मी भी त्वेमा सबा रुपया चढाई ध्युलू !
पराशर गौर
दिनाक ४ अगस्त २०१० स्याम ६ ५३ पर