शनिवार, 24 अप्रैल 2010

आवा बौडी


आवा बौडी
आवा बौडी आवा बौडी
अपणो तै ना जावा छोडी
यखुली छाजा मा बैठी छ बोडी
बोडा लेण छ लखडा तोडी
धै लगाणा छ्न बाजा कुडी
मेरा अपणो आवा बौडी

मै अभागी ईन भी रायी
ब्यो करि तै ल्यायी ब्वारी
पहली हि महिना चली गेय दिल्ली
बुढि-बुढिया हम रै गें यखुली
बुढि-बुढियों तै जावा ना छोडी
मेरा अपणो आवा बौडी

दादा मनु छ हुक्का कि सोडी
पर आन्खियों मा नाति कि मुखडी
सालो हवेगेन नाती नी बौडी
सभी चली गेन हम तै छोडी
मेरा अपणो आवा बौडी
हमतै ना जावा छोडी

दादी की ता झुरी गे जिकुडी
लडिक ब्वारियों का बाठा देखी
गोर गुठ्यार भैसियों कि तान्दी
आज देखा सब पुडियां छ्न बाझी
आवा बौडी आवा बौडी
अपणो तै ना जावा छोडी

लेखक:- विनोद जॆठुडी (vsjethuri@gmail.com)

6 टिप्‍पणियां:

  1. विनोद बहुत बढिया। डडरियाल जी क रचना से प्रभावित ... जय हो!

    आशा च कि कुमाऊँनी भै बैणा भी ये ब्लाग मा अपरु सहयोग देला त हम द्वी(कुमाऊँनी/गढवाली) भासा/बोलि कू ये ब्लाग तै उत्तराखंड से सही मानो मा जोड सक्दा।

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  2. बहुत ही प्रभावशाली रचना च विनोद भाई...
    तुमल उत्तराखंड कु कड्वू सच समण ला दी..
    साझा कन कु धन्यवाद् !!

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  3. विनोद जी आपन त उत्तराखंड की सच्चाई कु बखान बहुत ही अच्छा
    ढंग सी कारि,आप का भीतर त बहुत बडू कवी च,आप थैं मेरु प्रणाम.

    DIINESH CHAMOLI

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  4. bhai jee aaapan uttrakhand kee sachayi par jo likhi cha bahut badhiya lagi
    suman bhatt

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  5. बहुत बहुत धन्यबाद दोस्तो.. आप कु ईनी प्रोत्साहन मिलदु रालु ता अगने और भी कवितायें व गीत लिखणु मा मै तै प्रोत्साहन मिललु.... जय उत्तराखन्ड...

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  6. meri tarf se der shubkamnaye aap ku.aap t pahad ki jaan ho.etni shundar kavita likhi hai mere to nayan bhar aaye...
    I have no words...

    keep it ap....

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