रविवार, 2 मई 2010

त्यों डालियों ना काट बोडा हे

हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - 2
ब्वाडी भी बतौव बोडा हे
डाली कभी नी काटी बोडी हे
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - (कोरस)

बसकाल जब औनदु बोडा हे
दवी डाली लगावा बोडा हे - 2
तुम ता चली जैल्या बोडा जी
डाली बची राली बोडा जी
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - (कोरस)

लखडो कु बान बोडा हे
जगलं कु नास बोडा हे - 2
सुख्या लखड काटा बोडा जी
घास- घास काटा डालियो कि
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - (कोरस)

त्यों सुख्या डाडं बोडा हे
हरी भरी बणावा बोडा हे -2
जीवन ही डाली बोडा हे
बरखा पाणि भी देन्दा बोडा हे
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे - (कोरस)

हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डाल ना काट बोडा हे
हे बोडा सुणी ले बोडा हे
त्यों डालियों ना काट बोडा हे हे हे................

गीतकार :- विनोद जेठुडी - दगडिया उत्तराखन्डी

(अपनी बोलि अर अपणी भाषा क दग्डी प्रेम करल्या त अपणी संस्कृति क दगड जुडना मा आसानी होली)

1 टिप्पणी:

  1. सुंदर संदेश - नेगी जी ने भी अपने गीतो से ये स्ंदेश दिया था। अच्छा प्रयास विनोद भुल्ला

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